रोहतक | क्या कभी 5 रुपए के गोलगप्पों भी किसी को अदालत तक पहुंचा सकते है? हरियाणा के रोहतक जिले के महम में ऐसा ही हुआ है, जहां गोलगप्पों की कीमत को लेकर शुरू हुआ झगड़ा अदालत में पहुंचा और 12 साल बाद खत्म हुआ. आइए जानते है पूरी कहानी…
हरियाणा के रोहतक जिले के महम कस्बे में वर्ष 2013 में गोलगप्पों को लेकर हुआ मामूली झगड़ा एक बड़ा कानूनी विवाद बन गया. लगभग 12 साल तक चली सुनवाई के बाद महम अदालत ने इस मामले में दोनो पक्षों से जुड़े 9 लोगों को सबूतों के अभाव के चलते बरी कर दिया.
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 21 मई 2013 की शाम की है. महम के राजीव चौक पर सूबे सिंह नाम का व्यक्ति गोलगप्पों की रेहड़ी लगाता था. उसी समय अनिल नाम का युवक अपने 2 दोस्तों के साथ गोलगप्पे खाने पहुंचता है. जब उन्होंने रेहड़ी वाले से गोलगप्पों की कीमत पूछी तो उसने 5 रुपए के 4 गोलगप्पे बताएं. इस पर युवकों ने कहा कि आसपास की दूसरी रेहड़ियों पर 5 रुपए में 5 गोलगप्पे देते है, इसीलिए उन्हें भी 5 ही चाहिए. इस बात पर बहस होते- होते बात मारपीट तक पहुंच गई.
दोनों तरफ से केस दर्ज
मारपीट होने के बाद रेहड़ी संचालक की शिकायत पर पुलिस ने अनिल और उसके दोस्तों के खिलाफ मामला दर्ज किया. दूसरी ओर, अनिल ने भी आरोप लगाया कि उसके साथ मारपीट की गई है. उसने उस समय के थाना प्रभारी, पुलिस चौकी इंचार्ज, दो ASI, रेहड़ी संचालक और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दी लेकिन जब पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं तो अनिल के पिता सत्यवान, जो उस समय उत्तर हरियाणा बिजली प्रसारण निगम के फोरमैन थे उन्होंने 10 अक्तूबर 2013 को महम अदालत में निजी शिकायत दर्ज करवाई.
12 साल तक चला मामला
इस मामले में अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली और कुल 15 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. कई सालों तक दोनों पक्षों के केस साथ- साथ चले. लंबी सुनवाई के साथ अदालत ने पाया कि मामले में कोई खास सबूत नहीं है इसीलिए दोनों पक्षों से जुड़े 9 आरोपियों को बरी कर दिया.
