जींद | सियासी अखाड़े में अपनी किस्मत आजमाने वाले अपना भविष्य किसी सुरक्षित सीट में तलाश रहे हैं. जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिसीमन की कार्रवाई सिरे चढ़ने की संभावना से ही वे अपनी सियासी बिसात बिछाने की तैयारी में जुट गए हैं. सूबे में राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय माने जाने वाले जींद जिले में राजनीतिक पारी खेलने वाले भी फिलहाल अपने सियासी भविष्य को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति में हैं.

परिसीमन को लेकर अटकलें लगाई जा रही है कि 2029 के दौरान लोकसभा और विधानसभा की सीटें निश्चित तौर पर बढ़ी हुई मिलेगी. अटकलों के बाजार में 2029 को लेकर माना जा रहा है कि 90 की बजाय 117 विधानसभा सीटें और 10 की बजाय 13 लोकसभा सीटें तय होने की संभावना है. जींद जिले के 5 विधानसभा क्षेत्र तीन लोकसभा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं.
जींद उभरेगा नया लोकसभा क्षेत्र
परिसीमन को लेकर जो अटकले बाहर आ रही है उस पर भरोसा करें तो 2029 में हरियाणा के सियासी नक्शे में जींद अलग लोकसभा क्षेत्र उभरकर सामने आएगा. इस लोकसभा क्षेत्र में जो 9 विधानसभा क्षेत्र आ रहे है उनमें जुलाना, सफीदों, उचाना कलां, जींद, जींद ग्रामीण, कंडेला (जींद), इसराना, मतलोडा मंडी (पानीपत), लाखन माजरा (रोहतक) बताये जा रहे है. वहीं, जींद जिले के नरवाना विधानसभा क्षेत्र को कैथल लोकसभा में जोड़कर देखा जा रहा है.
अटकलो के लिहाज से जो तस्वीर सामने आ रही है उसके कारण जींद को लेकर खासी रोचक स्थिति नजर आ रही है. खासकर जींद विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ने की दौड़-धूप करने वाले नेताओं के सामने चंडीगढ़ पहुंचने के लिए तीन राहें तय हो रही है. राजनीतिक पंडितो का मानना है कि जींद शहरी और जींद ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के तो कयास लगते रहे है किंतु जींद, जींद ग्रामीण और कंडेला जींद की जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही है वह कैसे तय होगी यह बात अभी सियासी जायका वालो को हजम नहीं हो पा रही है.
परिसीमन के बाद ही दिखेंगे नेता
परिसीमन होने के बाद कौन से गांव किस विधानसभा क्षेत्र में जमा होंगे और किसमें से घटेंगे इसकी पुख्ता तस्वीर सामने आने के बाद ही नेता अपने लिए मैदान का चयन करेंगे. इसलिए विधानसभा चुनाव लड़ने की सोच रखने वाले जहां संशय की स्थिति से गुजर रहे है. वहीं, इस बात से गुलजार भी नजर आ रहे है कि टिकट की दौड़ में इस बार उनकी लाटरी आसानी से लग सकती है.
कांग्रेस और बीजेपी में टिकट के लिए लंबी कतार लगती रही है. इसलिए इन दोनों पार्टियों के नेता परिसीमन को लेकर खासा संजीदा नजर आ रहे है. INLD इधर-उधर से नेताओं को अपने पाले में लाकर पार्टी को मजबूती देने की कसरत में जुटी हई है. AAP और JJP फिलहाल वेट एंड वाच की नीति पर चलते हुए ठहराव के मोड में नजर आ रही है.