दिल्ली जल बोर्ड का बड़ा फैसला, पानी की सप्लाई को लेकर बनेगी नई नीति

नई दिल्ली | राजधानी में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है. कुछ इलाकों में जल संकट की समस्या भी सामने आ रही जिसको देखते हुए दिल्ली सरकार जल वितरण व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. इससे किसी भी क्षेत्र को पानी की कमी का सामना न करना पड़े. शहर के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि वर्तमान में कुछ क्षेत्रों में कम आबादी के बावजूद अधिक पानी की आपूर्ति हो रही है जबकि अधिक आबादी वाले इलाकों में पानी अपेक्षाकृत कम पहुंच रहा है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड नई वितरण व्यवस्था पर काम कर रहा है. इसके तहत, यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र को कितनी मात्रा में और कितनी अवधि तक पानी उपलब्ध कराया जाए.

Water Pani

सरकार विभिन्न क्षेत्रों की जनसंख्या, जल मांग, उपलब्ध आपूर्ति और मौजूदा बुनियादी ढांचे का वैज्ञानिक अध्ययन करवाएगी. इसके आधार पर नई जल वितरण नीति तैयार की जाएगी. अधिकारियों का मानना है कि इससे पानी के बेहतर प्रबंधन के साथ शिकायतों में भी कमी आएगी.

कई परियोजनाओं पर काम जारी

दिल्ली में गर्मियों के दौरान पानी की मांग करीब 1,250 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) तक पहुंच जाती है जबकि उत्पादन क्षमता लगभग 1 हजार एमजीडी है. हाल ही में यमुना नदी में जल स्तर कम होने के कारण उत्पादन में करीब 100 एमजीडी की कमी भी दर्ज की गई है जिससे कुछ इलाकों में आपूर्ति प्रभावित हुई है. जल बोर्ड पानी की बर्बादी रोकने के लिए भी कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है. नॉन- रेवेन्यू वॉटर रिसाव, चोरी और तकनीकी खामियों से होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में डीएसबी नहर को खुली नहर प्रणाली से बंद पाइपलाइन प्रणाली में बदलने की योजना पर विचार किया जा रहा है.

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IIT रुड़की से ली जा रही मदद

वर्तमान में इस नहर प्रणाली में 40 से 45 प्रतिशत तक पानी का नुकसान हो जाता है जिसपर अध्ययन के लिए IIT रुड़की की मदद ली जा रही है. मंत्री के अनुसार, दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से केवल 12 से 13 क्षेत्रों से ही पानी की अधिक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं. इनमें गोकलपुर, सुल्तानपुर, उत्तम नगर, घोंडा, बुराड़ी, विकासपुरी, ओखला, देवली, किराड़ी, बदरपुर, संगम विहार, मुस्तफाबाद और करावल नगर शामिल हैं. सरकार पुरानी जल पाइपलाइनों को भी बदलेगी. दिल्ली के 16,634 किलोमीटर लंबे जल नेटवर्क में करीब 5,500 किलोमीटर पाइपलाइनें 30 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं. इनसे रिसाव और प्रदूषण होती रहती है.

ड्यूल पाइपिंग सिस्टम को बढ़ावा

प्रदेश सरकार ड्यूल पाइपिंग सिस्टम को बढ़ावा देने की योजना बना रही है. इसके तहत, शोधित सीवेज जल को अलग पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से बागवानी, निर्माण कार्य, वाहन धुलाई और फ्लशिंग जैसे कार्यों में उपयोग किया जाएगा जबकि ताजा पेयजल केवल घरेलू और पीने के उपयोग के लिए रखा जाएगा. इसकी शुरुआत सरकारी भवनों और सार्वजनिक संस्थानों से की जाएगी.

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