दिल्ली के हजारों कर्मचारियों की बढ़ेगी तनख्वाह, MCD ने शुरू की तैयारी

नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली नगर निगम (MCD) में कार्यरत डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स (DBC) कर्मचारियों को लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत मिलने जा रही है. वर्षों से समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग कर रहे इन कर्मचारियों को अब न्यूनतम मजदूरी के बजाय स्थायी कर्मचारियों की तर्ज पर वेतन देने की तैयारी शुरू हो गई है. इससे हजारों कर्मचारियों के वेतन में हर महीने करीब 10 से 12 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है. महापौर प्रवेश वाही की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई.

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बैठक में महापौर ने अधिकारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए. उन्होंने इसे कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला बताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित इस मांग को जल्द पूरा किया जाएगा.

कर्मचारियों की नियुक्ति

1996 में दिल्ली में डेंगू के बढ़ते प्रकोप के दौरान आपात स्थिति में डीबीसी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी. उस समय राजधानी में डेंगू के करीब 10 हजार मामले सामने आए थे और 400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. मच्छरों की रोकथाम और घर-घर जाकर जांच करने के लिए इन कर्मचारियों को रखा गया था. उस समय उनका मासिक वेतन 2,200 रुपये तय किया गया था. समय के साथ वेतन में कुछ बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन इन कर्मचारियों को लंबे समय तक छुट्टी, मेडिकल सुविधा और ईपीएफ जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल सकीं.

अधिकांश डीबीसी कर्मचारियों को करीब 18 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है. वहीं, तत्कालीन उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 213 कर्मचारियों को पहले ही एमटीएस की तर्ज पर समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जा चुका है जबकि बाकी कर्मचारी इस लाभ से वंचित हैं.

वेतन वृद्धि की मांग

इसी असमानता को लेकर कर्मचारी लगातार नियमितीकरण और वेतन वृद्धि की मांग करते रहे हैं. कई बार धरना- प्रदर्शन भी किए गए. कर्मचारी यूनियन का कहना है कि वे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए घर-घर जाकर जोखिम भरा काम करते हैं. ऐसे में उन्हें दूसरे कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलना चाहिए. सूत्रों के मुताबिक, इस योजना का लाभ लेने के लिए डीबीसी कर्मचारियों को विभाग में एक एफिडेविट देना होगा. इसमें उन्हें यह घोषणा करनी होगी कि वे मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) की तर्ज पर कार्य करेंगे. एमसीडी की नई नीति में यह शर्त शामिल की जा रही है और केवल एफिडेविट जमा करने वाले कर्मचारियों को ही समान वेतन का लाभ मिलेगा.

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मिली ये सुविधाएं

डीबीसी कर्मचारियों को 2017 में तत्कालीन महापौर कमलजीत सहरावत के हस्तक्षेप के बाद छुट्टी, ईएसआई और ईपीएफ जैसी सुविधाएं मिली थीं. 2023 में सरकारी व्यवस्था में डीबीसी नाम का अलग पद नहीं होने के कारण उन्हें एमटीएस का दर्जा दिया गया. अब समान कार्य के लिए समान वेतन लागू होने से करीब 3,500 कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है. महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि एमसीडी कर्मचारियों के साथ खड़ी है और उनकी अन्य समस्याओं का भी चरणबद्ध तरीके से समाधान किया जाएगा.

वहीं, एंटी मलेरिया कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष देवानंद शर्मा ने कहा कि यदि समान कार्य के लिए समान वेतन लागू होता है तो यह हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी.

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Sanjukta Pandit
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