चंडीगढ़ | हरियाणा के सरकारी राशन वितरण व्यवस्था में लगातार हो रहे बदलावों से उपभोक्ताओं, खासकर बुजुर्ग राशन कार्ड धारकों की परेशानी बढ़ गई है. पहले ही बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान बुजुर्गों को अंगूठे की स्कैनिंग में दिक्कत आती थी. अब चीनी, गेहूं और तेल के लिए अलग- अलग बायोमेट्रिक स्कैन की व्यवस्था होने से उन्हें एक ही राशन डिपो पर कई बार जाना पड़ रहा है. नई व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ताओं को हर महीने अलग- अलग राशन लेने के लिए डिपो पर जाने की जरूरत नहीं होगी.
सितंबर और अक्टूबर का राशन एक साथ देने की योजना है. इससे उपभोक्ताओं को बार-बार डिपो के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी. खासतौर पर बुजुर्गों के लिए यह बदलाव सुविधाजनक साबित हो सकता है.
खाते में आएगी राशि
सरकारी स्तर पर सरसों की खरीद समय पर नहीं होने के कारण सरसों तेल की सप्लाई में परेशानी आई है. इसी वजह से अब सरसों तेल के स्थान पर निर्धारित राशि सीधे राशन कार्ड धारकों के बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था की जा रही है. पहले राशन कार्ड धारकों को 2 लीटर सरसों तेल के लिए 100 रुपए दिए जाते थे. सरकारी खरीद और सप्लाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण तेल वितरण के बजाय खाते में राशि भेजने का विकल्प अपनाया गया है.
बदलाव से बढ़ रही परेशानी
उपभोक्ताओं की शिकायत है कि नियमों में बार- बार बदलाव और अलग- अलग वस्तुओं के लिए सत्यापन की प्रक्रिया से उनकी परेशानी बढ़ रही है. नई व्यवस्था के प्रमुख बदलावों में सरसों तेल की जगह खाते में राशि, दो महीने का राशन एक साथ और डिजिटल प्रक्रिया शामिल हैं. इससे समय की बचत होगी. हालांकि, बुजुर्ग उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया को आसान बनाना अभी भी बड़ी जरूरत बनी हुई है.
