नई दिल्ली | नौकरी ज्वाइन करने के महज 10 मिनट बाद किसी कैंडिडेट का ऑफर ठुकरा देना हैरान करने वाला है, लेकिन दिल्ली के बिजनेसमैन अभिषेक अग्रवाल से जुड़ी एक कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है. खास बात यह रही कि कैंडिडेट के फैसले पर नाराज होने के बजाय अभिषेक ने अपनी कंपनी की कमी को स्वीकार किया और उसी युवक को ऑफिस का वर्क कल्चर सुधारने की जिम्मेदारी दे दी.
अभिषेक ने लिंक्डइन पर बताया कि कैंडिडेट का चयन चार राउंड के इंटरव्यू और करीब तीन सप्ताह की प्रक्रिया के बाद हुआ था. जॉइनिंग के दिन वह ऑफिस पहुंचा और कुछ देर लॉबी में बैठा. अभिषेक जब उसका स्वागत करने पहुंचे तो कैंडिडेट ने नौकरी लेने से इनकार कर दिया.
बॉस ने खुद देखी हकीकत
उसने साफ कहा कि ऑफिस का माहौल उसे काफी नकारात्मक और तनावपूर्ण महसूस हुआ. कर्मचारियों के चेहरे पर खुशी नहीं थी और पूरा वातावरण उसे उदास नजर आया. पहले अभिषेक को कैंडिडेट की बात कुछ अजीब लगी, लेकिन उसके जाने के बाद उन्होंने ऑफिस को अलग नजर से देखना शुरू किया. तब उन्हें महसूस हुआ कि कर्मचारी वास्तव में काफी दबाव में काम कर रहे थे. लॉबी में भी रौनक नहीं थी और खिड़कियों के पास रखे पौधे तक सूखे हुए थे.
अभिषेक ने कैंडिडेट को दोबारा संपर्क किया. इस बार नौकरी की पेशकश के बजाय उन्होंने कंपनी का माहौल बदलने की जिम्मेदारी उसके सामने रखी. कैंडिडेट ने चुनौती स्वीकार कर ली.
3 महीने में दिखा बदलाव
नई जिम्मेदारी का असर कुछ ही महीनों में नजर आने लगा. कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर कम हुई और रिटेंशन 70% तक पहुंच गया. कंपनी की सेल्स में भी 30% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके साथ ग्लासडोर रेटिंग में भी सुधार हुआ. कैंडिडेट के काम से प्रभावित होकर कंपनी ने महज एक साल के भीतर उसे चीफ पीपल ऑफिसर यानी HR हेड बना दिया.
सोशल मीडिया पर यह कहानी इसलिए भी पसंद की जा रही है क्योंकि अभिषेक ने आलोचना को व्यक्तिगत अपमान मानने के बजाय उसे कंपनी में बदलाव का अवसर बनाया. कैंडिडेट की ईमानदार प्रतिक्रिया को स्वीकार कर उन्होंने साबित किया कि बेहतर वर्क कल्चर के लिए सबसे पहले समस्या को पहचानना जरूरी है.
