धर्म डेस्क | ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती को लेकर अक्सर लोगों के मन में डर बना रहता है. ऐसा माना जाता है कि साढ़े सात साल का यह दौर जीवन में कई तरह के उतार- चढ़ाव लेकर आता है. ज्योतिष के अनुसार, इसे केवल परेशानियों से जोड़कर देखना सही नहीं है. शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है इसलिए व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार परिणाम मिलने की मान्यता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी समय शनि की साढ़ेसाती आती है.
इस दौरान व्यक्ति को अपने कर्मों और जीवन की वास्तविकता को समझने का अवसर भी मिलता है. अगर किसी की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है और उसे लगातार काम में रुकावट महसूस हो रही है, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ उपाय किए जा सकते हैं.
भगवान शिव की करें पूजा
शनिदेव को भगवान शिव का भक्त माना जाता है. ऐसे में रोजाना शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है. धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव की विशेष कृपा रहती है. मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना लाभकारी माना जाता है.
बेजुबान जीवों को दें भोजन
शनिवार के दिन काले कुत्ते, गाय और पक्षियों को भोजन कराने की परंपरा है. चींटियों को आटा या चीनी खिलाना भी शनि की साढ़ेसाती में किया जाने वाला उपाय माना जाता है. शनिवार को गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को काले कपड़े, उड़द की दाल, सरसों का तेल या जूते-चप्पल दान करने की मान्यता है. दान बिना दिखावे के करना शुभ माना जाता है.
पीपल के नीचे जलाएं दीपक
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिवार शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद रहती है.
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