फरीदाबाद | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद में इन दिनों दवा बैंक सुर्खियां बटोर रहा है. मीनू द्वारा संचालित इस बैंक में पैसा नहीं बल्कि दवाइयां जमा होती हैं और जरूरतमंद लोगों को ये दवाइयां बिल्कुल मुफ्त में दी जाती है.

दवा बैंक पर मिलेगी मुफ्त दवाइयां
आज के समय में दवाईयों की आसमान छूती कीमतें गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए चुनौती बन चुकी है. मीनू ने इस समस्या का हल निकालते हुए अपने 12 दोस्तों के साथ मिलकर पिछले 6 साल से इस दवा बैंक का सफल संचालन कर रही है. सभी दोस्त अलग- अलग प्रोफेशन में कार्यरत हैं लेकिन सभी हर दिन करीब 2 घंटे का समय निकालकर लोगों के घर- घर जाकर उनके यहां बची हुई दवाइयां एकत्रित करते हैं. फिर इन दवाइयों को दवा बैंक में जमा किया जाता है.
मीनू ने बताया कि यहां कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति डाक्टर की पर्ची लेकर आता है तो उसे यहां पर जो दवाइया उपलब्ध है, वो बिल्कुल मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती है. उनकी टीम के साथ कई डॉक्टर भी जुड़े हुए हैं जो फ्री में पर्ची देकर मरीजों को दवाईयां देते हैं. किसी तरह की मेडिकल एमरजेंसी में भी मीनू और उसकी टीम सदैव तैयार रहती है. इसके लिए मरीज से 1 रुपया भी नही लिया जाता है.
इस तरह आया दिमाग में आइडिया
उन्होंने बताया कि अक्सर देखने में आता है कि गरीब और मजदूर तबके के लोगों के पास दवाइयां खरीदने तक के पैसे नहीं होते हैं. वहीं, कुछ लोग ऐसे हैं जो छोटी- मोटी बीमारी होते ही डाक्टर को दिखाकर झट से दवाई ले आते हैं. ये लोग 2- 3 दिन दवाइयां खाते हैं और बची हुई दवाइयों को कूड़े के ढेर में फेंक देते हैं. मैंने और मेरी टीम ने यह सब देखकर सोचा कि क्यों ना इन दवाइयों को इकट्ठा किया जाए और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त में मुहैया करवाया जाएं. इसके साथ सभी दोस्तों ने मिलकर दवा बैंक का संचालन शुरू कर दिया.
गरीबों के लिए राहत बना दवा बैंक
दवा बैंक की शुरुआत करने वाली मीनू ने बताया कि सबसे पहले हमने एक ग्रुप बनाया और फिर हम लोगों के घर-घर जाकर बची हुई दवाइयां इकट्ठा करने लगे. सोशल मीडिया के जरिए भी हमने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर आपके पास कोई भी बची हुई दवाई है तो वे हमें दे दें. लोग हमारे इस अभियान से प्रेरित हुए और हमें दवाइयां पहुंचाने लगें. आज हमारे पास विदेश से भी दवाइयां डोनेट हो रही हैं.
मीनू की ये अनोखी पहल आज सैकड़ों जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी राहत बन चुकी है. उन्होंने उस बारे में सोचा, जिस बारे में शायद ही कभी किसी ने सोचा हो और आज वे समाज के लिए एक मार्गदर्शी बन चुकी है. उनकी इस पहल से गरीबों को मुफ्त में दवाइयां मिल रही हैं जिन्हें शायद वे खरीद नहीं पाते या खरीदने के लिए कहीं से जुगाड़ कर काफी पैसे चुकाने पड़ते.
उम्मीद की जानी चाहिए कि मीनू से प्रेरणा लेकर देश के अलग- अलग शहरों और कस्बों में भी ऐसे दवा बैंक जल्द देखने को मिलेंगे जो गरीब जरूरतमंद लोगों की मुफ्त दवाओं से मदद करेंगे.