नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ईंधन संकट के बीच सरकार घरेलू गैस (LPG) उत्पादन पर तेजी से काम कर रही है. इसी कड़ी में गैस आधारित तकनीकों और वैकल्पिक ईंधन मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयातित LPG और कच्चे तेल से पूरा करता है, लेकिन अब सरकार घरेलू ईंधन को बढ़ावा दे रही है. सरकार का यह ब्रह्मास्त्र विदेशी गैस और ईंधन पर निर्भरता कम करने में मील का पत्थर साबित होगा.

इस तरह होगा कार्य
जिस कोयले का इस्तेमाल हम बिजली बनाने में करते है, अब सरकार उसी का डबल उपयोग करने जा रही है. कोयला भारत के पास प्रकृति का दिया हुआ खजाना है. भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला भंडारों में से एक है. यहां करीब 401 अरब टन कोयला और 47 अरब टन लिग्नाइट मौजूद है. आज भी हमारी जरूरतों का 55% से अधिक हिस्सा कोयला से पूरा होता है.
अब सरकार कोयले और लिग्नाइट से ‘सिनगैस’ बनाने पर काम कर रही है. इस क्रांतिकारी तकनीक को ‘गैसीफिकेशन’ कहा जाता है. इस प्रक्रिया में कोयले को बिना जलाए रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से गैस में बदल दिया जाता है. इस सिनगैस से देश में ही उत्तम क्वालिटी का ईंधन और कई जरूरी रसायन बनाए जा सकेंगे. इस गैस का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे विदेशी LPG और ईंधन पर निर्भरता कम होगी.
आत्मनिर्भर भारत बनने की ओर कदम
भारत हर वर्ष अपनी जरूरतों के लिए LNG, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया, कोकिंग कोल, मेथनॉल और DME जैसे उत्पादों के आयात पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च करता है. अगर वित्तीय वर्ष 2025 के आंकड़ों की बात करें तो भारत का इन चीजों पर करीब 3 लाख करोड़ रूपए आयात बिल रहा है. ऐसे में अब सरकार ने इस योजना को धरातल पर उतारने का फैसला लिया है.
इस योजना के तहत 8 बड़ी परियोजनाओं को शामिल किया गया है और सरकार इन पर तेजी से काम कर रही है. जैसे ही यह परियोजनाएं पूरी होती है वैसे ही भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है.