महेंद्रगढ़ | आधुनिकता के इस दौर में डिजिटल भुगतान का प्रचलन जितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, उतने ही ज्यादा साईबर फ्रॉड के मामले भी सामने आ रहे हैं. ऐसी ही 20 हजार रुपए की साईबर ठगी महेंद्रगढ़ निवासी अंकित ठाकुर के पिता के साथ भी हुई. इस घटना ने बीटेक कंप्यूटर साइंस के छात्र अंकित को झकझोर कर रख दिया था लेकिन उन्होंने हाथ पर हाथ रखकर बैठने की बजाय ठगी की जड़ तक जाने का फैसला लिया.

अंकित ने अपने पिता के साथ हुई ठगी का बदला मौजूदा UPI सिस्टम की 3 खतरनाक खामियों को ढूंढ कर लिया, जिसका फायदा उठाकर हैकर्स लोगों के बैंक खातों से पैसें उड़ा रहे थे. इतना ही नहीं उन्होंने एक ऐसा अल्टरनेटिव UPI सिस्टम भी तैयार किया है जो बेहतर और पूरी तरह से सुरक्षित भी है.
अंकित ने खोजी 3 तकनीकी खामियां
- पहली खामी Chrome इंटेंट वल्नरेबिलिटी से संबंधित है, जिसके जरिए कोई भी खतरनाक वेबसाइट आपकी बिना मर्जी के सीधे पेमेंट ऐप खोल सकती है.
- दूसरी खामी ऑथेंटिकेशन बाईपास से जुड़ी है, जिससे ऐप लॉक या बायोमेट्रिक्स को चकमा दिया जा सकता है.
- तीसरी और सबसे ख़तरनाक खामी ऑडियो हाईजैक से जुड़ी है. इसमें जब आप पेमेंट ऐप खोलते हैं तो बैकग्राउंड में छुपा कोई फर्जी ऐप आपको अपने अनुसार ऑडियो सुना सकता है, जैसे कि पैसे प्राप्त करने के लिए पिन डालें. ऐसे में यूजर इसे पेमेंट ऐप का निर्देश मानकर ठगी का शिकार हो जाता है.
साइबर फ्रॉड पर लगेगी रोक
इन खामियों को दूर करने के लिए तलवाना खेड़ी गांव निवासी अंकित ने एक नया UPI सिस्टम और मोबाइल ऐप विकसित की हैं जो न केवल साइबर फ्रॉड पर अंकुश लगाने में मदद करेगी बल्कि गलती से होने वाली ट्रांजेक्शन से होने वाले नुकसान को भी खत्म करेगी.
अंकित ने बताया कि उनका उद्देश्य अपनी इस तकनीक को पेटेंट कराकर पैसे कमाना नहीं बल्कि भारत सरकार को मुफ्त में देने की पेशकश की हैं ताकि देश के करोड़ों UPI ग्राहकों को साईबर फ्रॉड से बचाकर उनकी पूंजी को सुरक्षित रखा जा सकें. उन्होंने कहा कि यदि सरकार मदद करती है तो उनकी तकनीक ऑनलाइन बैंकिंग और साइबर अपराधों को रोकने में सुरक्षा एजेंसियों के काम आ सकती है.