चंडीगढ़ | भाखड़ा डैम का जलस्तर बढ़ने से पूर्व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने मानसून से पहले राज्य में मंडरा रहे संभावित बाढ़ संकट को लेकर हरियाणा सरकार (Haryana Govt) की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं जिससे भाखड़ा डैम का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. इसके बावजूद, सरकार स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज कर रही है.

दुष्यंत चौटाला ने चेतावनी देते हुए कहा कि पिछले वर्षों में आई भयानक बाढ़ से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है. यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इस बार भी किसानों की फसलें और सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति बनने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी.
बढ़ा भाखड़ा डैम का जलस्तर
पूर्व उप मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस समय भाखड़ा डैम का औसत जलस्तर सामान्य तौर पर 1543 फुट होना चाहिए जबकि वर्तमान में यह 1578 फुट तक पहुंच चुका है. जलस्तर अपने औसत से 35 फुट अधिक है और पिछले वर्षों में आई बाढ़ के समय दर्ज स्तर से भी करीब 20 फुट ज्यादा है. उन्होंने बताया कि गोबिंद सागर झील, जिसका जलग्रहण क्षेत्र लगभग 57 हजार वर्ग किलोमीटर है, उसमें ग्लेशियरों के पिघलने के कारण करीब 3 लाख करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी जमा हो चुका है. ऐसे में मानसून शुरू होने से पहले ही जलाशयों पर दबाव बढ़ गया है.
राजनीति पर निशाना
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि अभी तक मानसून की पहली बारिश भी पूरी तरह शुरू नहीं हुई है लेकिन डैम क्षमता के करीब भर चुके हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब मानसून अपने चरम पर होगा तो अतिरिक्त पानी का प्रबंधन कैसे किया जाएगा. उनके अनुसार, सरकार के पास पानी को सुरक्षित तरीके से सहेजने या उपयोग करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं है. उन्होंने SYL और पानी के अधिकारों को लेकर होने वाली राजनीति पर भी निशाना साधा.
नहीं किए जा रहे ठोस प्रयास
चौटाला ने कहा कि हरियाणा और पंजाब की सरकारें केवल कागजों पर पानी की राजनीति करती हैं जबकि ग्लेशियरों से मिलने वाले अतिरिक्त साफ पानी को संरक्षित करने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य का भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, लेकिन अतिरिक्त पानी को अंडरग्राउंड रिचार्ज के माध्यम से जमीन में पहुंचाने के लिए कोई मेगा प्लान तैयार नहीं किया गया. चौटाला ने मांग की कि हरियाणा सरकार, पंजाब सरकार, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय और BBMB की संयुक्त आपातकालीन बैठक बुलाई जाए. साथ ही, अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से नहरों और पानी की कमी वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा भूजल रिचार्ज की व्यवस्था तत्काल लागू की जाए.