चंडीगढ़ | हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में लंबे समय से अनुबंध पर पढ़ा रहे लेक्चररों के लिए राहत की खबर आई है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग को आदेश दिया है कि कंप्यूटर साइंस, कॉमर्स और मैनेजमेंट विषयों से जुड़े अनुबंधित लेक्चररों के नियमितीकरण पर लंबित मामलों का निपटारा 6 महीने के भीतर किया जाए.

अदालत ने साफ कहा कि कर्मचारियों को सालों तक अनिश्चित स्थिति में नहीं रखा जा सकता. ऐसे मामलों में समय सीमा के अंदर निर्णय लेना जरूरी है. अगर तय समय में फैसला नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों पर 50 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
अनुबंध के आधार पर कर रहे काम
यह मामला उन लेक्चररों से जुड़ा है जो हरियाणा के अलग- अलग सरकारी कॉलेजों में लंबे समय से अनुबंध के आधार पर काम कर रहे हैं. उन्होंने नियमितीकरण की मांग को लेकर अदालत का रुख किया था. उनका कहना था कि लगातार सेवा देने के बावजूद उनकी नौकरी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा रहा जिससे भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है.
देरी पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार की देरी पर नाराजगी जताई और कहा कि पात्र कर्मचारियों के मामलों को अनिश्चितकाल तक लंबित रखना सही नहीं है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी दावों की समीक्षा कर तय समय में कारण सहित निर्णय लिया जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी. अब शिक्षा विभाग को सभी अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की जांच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा और इसकी रिपोर्ट भी अदालत में पेश करनी पड़ सकती है.