चंडीगढ़ | पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी को दूर करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को जस्टिस हरमीत सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपेंद्र सिंह नलवा को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई. दोनों अब तक अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर कार्य कर रहे थे. पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके नामों को मंजूरी दी थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की.

यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट लंबे समय से न्यायाधीशों की कमी का सामना कर रहा है. हाईकोर्ट में कुल 85 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं. फिलहाल, केवल 55 जज ही कार्यरत हैं. यानी अभी भी करीब 30 पद खाली हैं. न्यायाधीशों की कमी के कारण लंबित मामलों के निपटारे पर भी असर पड़ रहा है.
हाईकोर्ट में 30 पद अब भी खाली
अब हाईकोर्ट को 10 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति का इंतजार है. इन अधिवक्ताओं के नामों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम पहले ही मंजूरी दे चुका है. जैसे ही केंद्र सरकार की ओर से औपचारिक अधिसूचना जारी होगी, उनकी नियुक्तियां भी प्रभावी हो जाएंगी. इन प्रस्तावित नियुक्तियों में पंजाब और हरियाणा, दोनों राज्यों के अधिवक्ता शामिल हैं. उम्मीद है कि इनके आने से अदालत की कार्यक्षमता और मामलों के निस्तारण की रफ्तार बढ़ेगी. नई नियुक्तियों के बावजूद न्यायाधीशों की कमी पूरी तरह खत्म होती नजर नहीं आ रही है.
10 और नामों का इंतजार
इसी साल हाईकोर्ट के 3 मौजूदा न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं. ऐसे में रिक्त पदों की संख्या फिर बढ़ सकती है और स्वीकृत पदों के मुकाबले कार्यरत जजों का अंतर बना रह सकता है. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ पर अधिकार क्षेत्र रखने वाले इस हाईकोर्ट में लाखों मामले लंबित हैं. ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने और मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए जरूरी माना जा रहा है. दो अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी जज बनाए जाने और 10 नए न्यायाधीशों की संभावित नियुक्ति को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.