चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार औद्योगिक और व्यावसायिक संस्थानों में कार्यरत श्रमिकों को दुर्घटना के कारण दिव्यांग होने पर आर्थिक सहायता प्रदान करती है. यदि कोई कर्मचारी नौकरी के दौरान या कार्यस्थल से बाहर किसी दुर्घटना अथवा अन्य कारण से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर 1 लाख से 3 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है. योजना के तहत ईएसआई मेडिकल बोर्ड के प्रमाणपत्र के आधार पर सहायता राशि तय की जाती है. 50 प्रतिशत तक दिव्यांगता होने पर 1 लाख रुपये, 51 से 70 प्रतिशत दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये और 71 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता होने पर 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है.

उदाहरण के तौर पर यदि किसी फैक्टरी कर्मचारी का सड़क दुर्घटना में पैर गंभीर रूप से घायल हो जाता है और ईएसआई मेडिकल बोर्ड उसकी 72 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणित करता है, तो वह इस योजना के तहत 3 लाख रुपये की सहायता पाने का पात्र होगा.
यह लोग करें आवेदन
योजना का लाभ हरियाणा के औद्योगिक या व्यावसायिक संस्थानों में कार्यरत अंशदाता श्रमिकों को मिलेगा. दुर्घटना कार्यस्थल के भीतर हुई हो या बाहर, दोनों ही स्थिति में पात्र श्रमिक सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस योजना के लिए सेवा अवधि या मासिक वेतन की कोई न्यूनतम शर्त निर्धारित नहीं की गई है. हालांकि, ईएसआई मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र की तिथि से दो वर्ष के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है. निर्धारित समय सीमा के बाद किए गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
ऐसे करें आवेदन
दिव्यांगता प्रमाणपत्र मिलने के बाद श्रमिक सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ श्रम विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है. विभाग द्वारा आवेदन और दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र पाए जाने पर आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाती है.
जरूरी दस्तावेज
- दिव्यांगता (विकलांगता) प्रमाणपत्र
- कर्मचारी की वेतन पर्ची
- नियोक्ता का प्रमाणपत्र
- चिकित्सकीय प्रमाणपत्र
- स्मार्ट कार्ड या कार्यालय का पहचान पत्र
- राशन कार्ड, ईएसआई कार्ड या परिवार पहचान पत्र (PPP)
- कर्मचारी प्रमाणपत्र