पंचकूला | आयुर्वेद के प्रति लोगों का बढ़ता भरोसा अब आंकड़ों में भी साफ दिखाई देने लगा है. पंचकूला स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) ने वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही करीब 50 हजार मरीजों का उपचार कर नया रिकॉर्ड बनाया है. संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. आधुनिक जांच सुविधाओं, अनुभवी आयुर्वेद विशेषज्ञों और समग्र उपचार प्रणाली के कारण एनआईए अब हरियाणा के साथ- साथ पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों के मरीजों के लिए भरोसेमंद स्वास्थ्य केंद्र बनकर उभरा है.

संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 42,030 मरीजों ने उपचार लिया था. 2025 में मरीजों की संख्या बढ़कर 80,878 पहुंच गई. वहीं, 2026 में जनवरी से जून के बीच ही उपचार लेने वाले मरीजों का आंकड़ा 50 हजार के पार पहुंच चुका है.
मरीजों की पहली पसंद
एनआईए में सबसे अधिक मरीज पंचकर्म, कायचिकित्सा, शल्य और शालाक्य तंत्र विभागों में उपचार के लिए पहुंचे. इस साल जून तक पंचकर्म विभाग में 11,591, कायचिकित्सा में 10,319 और शल्य विभाग में 9,415 मरीजों का इलाज किया गया. इसके अलावा, शालाक्य तंत्र में 5,390, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में 3,228, अगद तंत्र (विष चिकित्सा) में 2,838 तथा त्वचा एवं सौंदर्य विभाग में 2,572 मरीजों ने उपचार कराया. बाल रोग और योग चिकित्सा विभागों में भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे.
मरीजों की संख्या हर महीने लगातार बढ़ती गई. जनवरी में जहां 7,004 मरीज उपचार के लिए पहुंचे थे वहीं जून तक यह संख्या बढ़कर 9,548 हो गई. मई और जून के दौरान सबसे अधिक मरीजों ने संस्थान की सेवाओं का लाभ उठाया.
OPD के वार्षिक आंकड़े
| वर्ष | ओपीडी मरीज |
|---|---|
| 2024 | 42,030 |
| 2025 | 80,878 |
| 2026 (जनवरी-जून) | लगभग 50,000 |
2026 माहवार OPD आंकड़े
| माह | ओपीडी मरीज |
|---|---|
| जनवरी | 7,004 |
| फरवरी | 7,623 |
| मार्च | 7,527 |
| अप्रैल | 7,973 |
| मई | 8,911 |
| जून | 9,548 |
विभागवार OPD आंकड़े
| विभाग | ओपीडी मरीज |
|---|---|
| पंचकर्म | 11,591 |
| कायचिकित्सा | 10,319 |
| शल्य | 9,415 |
| शालाक्य तंत्र | 5,390 |
| प्रसूति एवं स्त्री रोग | 3,228 |
| अगद तंत्र | 2,838 |
| त्वचा एवं सौंदर्य | 2,572 |
आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध
संस्थान की मेडिकल ऑफिसर डॉ. मानसी ग्रेवाल ने बताया कि एनआईए में 12 विशेषज्ञ ओपीडी संचालित हैं. इनमें कायचिकित्सा, पंचकर्म, प्रसूति एवं स्त्री रोग, शल्य तंत्र, शालाक्य (नेत्र), मुख- नाक- दंत रोग, बाल रोग, अगद तंत्र, त्वचा एवं सौंदर्य, स्वास्थ्यवृत्त एवं योग सहित आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हैं. इसके अलावा, मरीजों के लिए 250 बिस्तरों वाली अत्याधुनिक आईपीडी भी संचालित की जा रही है. आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन संचालित इस संस्थान में कुलपति प्रो. संजीव शर्मा और डीन प्रो. गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं.
आधुनिक जांच सुविधाओं और अनुभवी चिकित्सकों की उपलब्धता के कारण मरीजों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है. आयुर्वेदिक उपचार के सकारात्मक परिणामों की वजह से हर साल उपचार कराने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है- प्रो. सतीश गंधर्व, डीन इंचार्ज