नई दिल्ली | भारत के राजस्थान का देवमाली गांव अपनी अनोखी परंपराओं और धार्मिक आस्था के कारण देशभर में खास पहचान रखता है. इस गांव को भगवान देवनारायण की नगरी भी कहा जाता है. यहां की जीवनशैली इतनी अलग है कि इसे आज भी सतयुग की झलक माना जाता है. ईमानदारी, भाईचारा और धार्मिक विश्वास के दम पर यह गांव वर्षों से अपनी परंपराओं को निभाता आ रहा है. देवमाली गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की पूरी जमीन भगवान देवनारायण के नाम समर्पित मानी जाती है. गांव के लोगों के नाम पर निजी भूमि नहीं है. ग्रामीण भगवान को ही इस भूमि का वास्तविक स्वामी मानते हैं और उसी आस्था के साथ खेती- बाड़ी और अन्य कार्य करते हैं.

इस गांव में आज तक चोरी की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई. अधिकांश लोग अपने घरों में ताले नहीं लगाते. चाहे परिवार संपन्न हो या सामान्य, ग्रामीण आपसी विश्वास और ईमानदारी के साथ जीवन बिताते हैं.
भारत का अनोखा गांव
गांव में भाईचारा इतना मजबूत है कि यहां का कोई भी विवाद आज तक कोर्ट- कचहरी या पुलिस थाने तक नहीं पहुंचा. लोग आपसी सहमति और सामाजिक परंपराओं के अनुसार ही अपने मतभेद सुलझा लेते हैं. देवमाली गांव में मांस, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है. ग्रामीण धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए सादा और सात्विक जीवन जीते हैं. इतना ही नहीं, गांव में केरोसिन के इस्तेमाल से भी परहेज किया जाता है. यहां की परंपराएं वर्षों से बिना किसी बदलाव के चली आ रही हैं.
नहीं लगते घरों में ताले
गांव में अधिकांश लोग आज भी पक्के मकानों की बजाय पारंपरिक शैली के घरों में रहना पसंद करते हैं. उनका मानना है कि सादगी और प्रकृति के करीब रहना ही जीवन का सबसे बड़ा सुख है. यही वजह है कि आधुनिकता के दौर में भी देवमाली अपनी सांस्कृतिक पहचान को संजोए हुए है. एक और अनोखी परंपरा यह है कि शनिवार के दिन गांव का कोई भी व्यक्ति दूध नहीं बेचता, चाहे उसके पास कितनी भी मात्रा में दूध क्यों न हो. ग्रामीण इस दिन को भगवान देवनारायण की श्रद्धा से जोड़ते हैं और अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं.
View this post on Instagram
सतयुग की झलक
अपनी अनूठी परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता के कारण देवमाली गांव देश- विदेश के लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है. यहां की संस्कृति और जीवनशैली को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. हालांकि, गांव से जुड़ी कई परंपराएं स्थानीय मान्यताओं और लोकविश्वासों पर आधारित हैं. ऐसे में यदि आप भी भारत के विभिन्न गांवों को एक्सप्लोर कर वहां की सभ्यता, संस्कृति, शांति, जीवनशैली इत्याति को करीब से जानना चाहते हैं, तो यहां जरूर जाएं.