ISRO की बड़ी कामयाबी, लगातार सफल मिशन से ‘नॉटी बॉय’ GSLV ने फिर जीता वैज्ञानिकों का भरोसा

नई दिल्ली | 4 सितंबर 2026 की अलसुबह जब देश का बड़ा हिस्सा नींद में था, तब श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में ISRO वैज्ञानिक एक अहम मिशन को अंजाम देने में जुटे थे. सुबह 2:55 बजे शुरू हुई इस प्रक्रिया का नतीजा महज 19 मिनट बाद सामने आया. सुबह 3:14 बजे GSLV-F17 रॉकेट ने EOS-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया.

ISRO

इस मिशन में ISRO के करीब 16,500 वैज्ञानिक, इंजीनियर और सहायक कर्मचारी जुड़े रहे. खास बात यह रही कि ‘नॉटी बॉय’ कहे जाने वाले GSLV Mk II ने लगातार सफल मिशन के जरिए अपनी विश्वसनीयता मजबूत की.

मिली राहत

PSLV की 2025 और जनवरी 2026 में हुई लगातार दो विफलताओं के बाद ISRO की लॉन्च क्षमता को लेकर सवाल उठे थे. ऐसे समय में GSLV पर जिम्मेदारी बढ़ गई थी. 19 मिशनों में से 6 बार असफल रहने के कारण GSLV को ‘नॉटी बॉय’ कहा गया था. अब EOS-05 की सफल लॉन्चिंग ने इस रॉकेट की क्षमता को साबित किया है. 2,376 किलोग्राम वजनी EOS-05 को पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर Geosynchronous Orbit में स्थापित किया गया है.

यह चक्रवात, बाढ़, जंगल की आग और जलवायु परिवर्तन जैसी स्थितियों की निगरानी में मदद करेगा. इसकी खासियत लगातार एक निश्चित क्षेत्र की निगरानी करने की क्षमता बताई गई है, जिससे मौसम और आपदाओं से जुड़ी जानकारी तेजी से मिल सकेगी.

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स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक की ताकत

1990 के दशक में अमेरिका और पश्चिमी देशों ने भारत को क्रायोजेनिक तकनीक देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद ISRO वैज्ञानिकों ने करीब 20 वर्षों की मेहनत से स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज विकसित की. कई परीक्षणों और असफलताओं के बाद भारत ने इस तकनीक में सफलता हासिल की. अगस्त 2021 में GSLV-F10 मिशन के दौरान क्रायोजेनिक स्टेज में समस्या आने से EOS-03 (GISAT-1) को कक्षा में स्थापित करने का प्रयास विफल हुआ था.

EOS-05 की सफलता को उस अधूरे प्रयास से आगे बढ़ी बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. ISRO अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन के नेतृत्व में मिली इस सफलता को आगामी मानवरहित ‘गगनयान’ मिशन के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.

जितेंद्र सिंह ने दी बधाई

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने GSLV-F17/EOS-05 के सफल प्रक्षेपण पर ISRO टीम को बधाई दी. उन्होंने इसे अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की एक और बड़ी छलांग बताया. उनके मुताबिक EOS-05 अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जो दृश्य, अवरक्त, बहु-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत इमेजिंग करने में सक्षम है.

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Sanjukta Pandit
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.