सिरसा | जम्मू- कश्मीर के राजौरी में देश की रक्षा करते हुए सिरसा जिले के गांव कुत्ताबढ़ निवासी जवान सुखचैन सिंह शहीद हो गए. करीब 30 वर्षीय सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव लाया जाएगा. यहां दोपहर करीब 12 बजे तक राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. सुखचैन सिंह के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद गांव में शोक की लहर है. गांव के सरपंच बेअंत सिंह ने कहा कि इस मुश्किल समय में पूरा गांव शहीद के परिवार के साथ खड़ा है. अंतिम संस्कार को लेकर गांव में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
शहीद के छोटे भाई सरबजीत सिंह ने बताया कि सुखचैन सिंह करीब दो महीने पहले छुट्टी पर घर आए थे. वीरवार सुबह करीब 8 बजे भी दोनों भाइयों की फोन पर बातचीत हुई थी. उस दौरान सुखचैन ने कहा था कि वह बिल्कुल ठीक हैं और करीब 10 दिन बाद छुट्टी लेकर घर आएंगे.
बेटे का था जन्मदिन
सरबजीत ने बताया कि 10 दिन बाद सुखचैन के 5 वर्षीय बेटे आकाशदीप का जन्मदिन था. इसी वजह से वह बेटे के जन्मदिन पर घर आने की तैयारी में थे. लेकिन उसी दिन दोपहर करीब 1 बजे परिवार को उनके शहीद होने की खबर मिल गई. सरबजीत सिंह के मुताबिक, परिवार रिश्तेदारी में एक मरगत में गया हुआ था. इसी दौरान राजौरी से एक अधिकारी का फोन आया. अधिकारी ने फोन पर बताया कि सुखचैन सिंह शहीद हो चुके हैं. खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया.
2015 में हुए थे भर्ती
सुखचैन सिंह 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए थे. हाल ही में उनकी तैनाती 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट राजौरी, कश्मीर में थी. वह ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के गांव कुत्ताबढ़ के रहने वाले थे. उनके परिवार में पत्नी निर्मल कौर और 5 साल का बेटा आकाशदीप है. सुखचैन की शादी करीब 6 साल पहले हुई थी. उनके पिता बलविंदर सिंह का पहले ही निधन हो चुका है, जबकि माता का नाम अमर कौर है.
सुखचैन सिंह कंबोज समाज से थे. परिवार में दो भाई और एक बहन हैं और सभी शादीशुदा हैं. उनके बड़े भाई गांव में शैटरिंग का काम करते हैं. दोनों भाइयों के परिवार लंबे समय से गांव कुत्ताबढ़ में रह रहे हैं.
