नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) अब अपने छात्रों को सिर्फ डिग्री तक सीमित न रखते हुए उन्हें वैश्विक अनुभव और रोजगारपरक शिक्षा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. गुरुवार को होने वाली कार्यकारी परिषद (ईसी) की 1283वीं बैठक में कुछ ऐसे अहम प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की संभावना है, जिन्हें डीयू के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इनमें सबसे प्रमुख प्रस्ताव सेमेस्टर अवे प्रोग्राम शुरू करने से जुड़ा है जिसके तहत छात्रों को अपने कोर्स का एक सेमेस्टर विदेश के किसी नामी विश्वविद्यालय में पूरा करने का मौका मिलेगा.

यह पूरा कार्यक्रम अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क यानी यूजीसीएफ-2022 के अंतर्गत लागू किया जाएगा. इससे छात्रों को विदेशी संस्थानों की शिक्षण व्यवस्था, शोध संस्कृति और वैश्विक पढ़ाई के तरीकों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा. वहां हासिल किए गए क्रेडिट को डीयू की डिग्री में जोड़े जाने की भी व्यवस्था की जाएगी.
प्रतिस्पर्धा क्षमता में इजाफा
इस पहल से छात्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता में इजाफा होगा और उच्च शिक्षा के साथ- साथ रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे. बदलती औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए बैठक में कई स्किल एन्हांसमेंट कोर्स को भी हरी झंडी दी गई है. इनमें एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट एंड आपर्च्युनिटी डिस्कवरी, डिजाइन थिंकिंग एंड वेंचर डेवलपमेंट, वेंचर बिजनेस डिजाइन एंड गो- टू- मार्केट स्ट्रेटेजी और एंटरप्रेन्योरियल कम्युनिकेशन एंड इन्वेस्टर पिचिंग जैसे नए जमाने के कोर्स शामिल हैं.
डिप्लोमा कोर्स शुरू
भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने की दिशा में भी अहम फैसले लिए गए हैं. दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े संस्थान के जरिए अरबी और फारसी भाषा में सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है. वहीं, बौद्ध अध्ययन विभाग की ओर से संस्कृत बौद्ध धर्म से जुड़े सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किए जाएंगे जिससे भारतीय ज्ञान परंपरा और शास्त्रीय भाषाओं की पढ़ाई को नया बल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.