कैथल | आगामी धान सीजन से पहले हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्ज एंड डिलर्ज एसोसिएशन की प्रदेश स्तरीय बैठक कैथल में हुई. इसमें नई पॉलिसी, CMR एक्सटेंशन, लंबित भुगतान, विभागीय समस्याओं, FCI से जुड़े मामलों और पिछले सीजन के बकाया कामों को लेकर मंथन किया गया. बैठक में मिलर्स ने साफ कहा कि कई पुराने मामलों का समाधान अब तक नहीं हुआ है, जबकि करीब 6 लाख मीट्रिक टन चावल अभी भी मिलों में पड़ा हुआ है.
प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि सरकार जब तक अतिरिक्त CMR की खरीद और राइस मिलर्स की दूसरी मांगों पर फैसला नहीं करती, तब तक मिलर्स CMR का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएंगे. वे धान की खरीद में भी भाग नहीं लेंगे.
नहीं होनी चाहिए खरीद प्रभावित
उन्होंने कहा कि धान का सीजन शुरू होने वाला है और किसानों की मेहनत से तैयार फसल की खरीद प्रभावित नहीं होनी चाहिए. मिलर्स खरीद एजेंसियों को अपने मिलों के फड़ उपलब्ध करवाने और किसानों की धान रखने में सहयोग के लिए तैयार हैं. हालांकि इन फड़ों पर रखी धान की जिम्मेदारी संबंधित खरीद एजेंसी की होगी. मांगों का समाधान होने तक मिलर्स स्वयं खरीद प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे. एसोसिएशन ने मांग रखी कि खरीद एजेंसियों की ओर से खरीदी जाने वाली धान सरकारी मापदंडों के अनुरूप हो.
धान में ब्रोकन 25 प्रतिशत से कम, नमी 17 प्रतिशत या इससे कम तथा डैमेज और डिस्कलर 2-2 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. धान को सरकारी मानकों के अनुसार बड़े पंखे से साफ किया हुआ होना चाहिए.
2 साल से बोनस लंबित
अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद पिछले दो वर्षों का बोनस अब तक लंबित है. उन्होंने धान की लोडिंग-अनलोडिंग चार्जेज, कस्टडी और मेंटेनेंस चार्जेज तथा बारदाना डेप्रिसिएशन से संबंधित भुगतान और पहले काटी गई राशि वापस करने की मांग उठाई. उन्होंने धान की ट्रांसपोर्टेशन का भुगतान जारी करने और चावल का उचित किराया देने की मांग भी रखी.
FCI में जगह की समस्या
मिलर्स ने हाइब्रिड धान में 40- 45 प्रतिशत तक ब्रोकन निकलने का मुद्दा भी उठाया. संगठन ने खरीद एजेंसियों से इस धान के संबंध में स्पष्ट नीति बनाने की मांग की. वहीं FCI में स्पेस की कमी को भी गंभीर समस्या बताया गया. संगठन के अनुसार करीब 843 मिलर्स इस वजह से परेशानी का सामना कर रहे हैं. बैठक में अन्न दर्पण ऐप से जुड़ी दिक्कतों और 50 लाख रुपए की एफडी से संबंधित प्रावधान पर भी चर्चा हुई. एसोसिएशन ने कहा कि मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखा जाएगा और सकारात्मक निर्णय के बाद ही आगामी धान सीजन में CMR रजिस्ट्रेशन और खरीद को लेकर अगली रणनीति तय की जाएगी.
