दिल्ली की हवा सुधरी लेकिन टला नहीं खतरा, PM 2.5 घटकर पहुंचा 97 माइक्रोग्राम

नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ करीब ढाई दशक से चल रही कोशिशों का असर हवा की गुणवत्ता के आंकड़ों में नजर आया है. हालांकि सुधार के बावजूद राजधानी की हवा अभी सुरक्षित स्तर से काफी दूर है. 2000 में दिल्ली का वार्षिक औसत PM 2.5 करीब 90.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो अगले एक दशक में लगातार बढ़ते हुए 2010 में 126.9 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया.

India Gate Smog

प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. 2025 में वार्षिक औसत PM 2.5 करीब 97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ. यानी 2010 के सबसे खराब स्तर की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन यह आंकड़ा राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से करीब ढाई गुना अधिक है.

दिखा उतार- चढ़ाव

पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली की हवा में सुधार लगातार एक जैसी गति से नहीं हुआ. वर्ष 2021 में PM 2.5 का वार्षिक औसत 105 माइक्रोग्राम था. 2022 में यह घटकर 98 माइक्रोग्राम हुआ, लेकिन 2023 में फिर बढ़कर 100 और 2024 में 105 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया. 2025 में प्रदूषण के स्तर में दोबारा गिरावट दर्ज की गई और वार्षिक औसत 97 माइक्रोग्राम रहा. 2018 के बाद कोविड प्रभावित वर्ष 2020 को छोड़ दें तो यह सबसे कम वार्षिक औसत रहा.

NCR तक बढ़ा दायरा

पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण से निपटने के तरीके में भी बदलाव आया है. वर्ष 2021 में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के गठन के बाद दिल्ली के साथ पूरे एनसीआर को एक इकाई मानकर प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई की दिशा में काम बढ़ा.

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वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और सड़क की धूल, खुले में कचरा जलाने तथा पराली जैसे अलग-अलग स्रोतों को ध्यान में रखकर कदम उठाए गए. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, पुराने वाहनों पर सख्ती और सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ ईंधन की ओर ले जाने की कोशिश हुई. अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के एनसीआर में प्रवेश पर भी चरणबद्ध प्रतिबंध लगाए गए.

PM 2.5 और PM 10 आंकड़े

वर्ष पीएम 2.5 पीएम 10
2021 105 211
2022 98 211
2023 100 206
2024 105 212
2025 97 198

26 साल का सबक

वर्ष पीएम 2.5 का वार्षिक औसत
2000 90.8
2005 101.1
2010 126.9
2015 112.1
2020 111.3
2025 97.0

धूल और पराली पर भी निगरानी

निर्माण स्थलों और सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, पानी के छिड़काव और धूल नियंत्रण से जुड़े नियमों को सख्त किया गया. उद्योगों में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल और उत्सर्जन नियंत्रण पर जोर बढ़ाया गया. खुले में कचरा जलाने की घटनाओं पर निगरानी और कार्रवाई बढ़ी. वहीं पराली जलाने के मुद्दे पर पंजाब और हरियाणा के साथ समन्वय बढ़ाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. इन प्रयासों के बीच पराली जलाने की घटनाओं में कमी भी दर्ज की गई है.

97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर का PM 2.5 स्तर बताता है कि दिल्ली की हवा को सुरक्षित स्तर तक लाने की चुनौती अभी बनी हुई है. सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन प्रदूषण से पूरी राहत के लिए लगातार और व्यापक स्तर पर प्रयास की जरूरत होगी.

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Sanjukta Pandit
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.