नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने पुराने उपायों के साथ कई नई तकनीकों को भी अपनाया है, लेकिन स्वच्छ वायु सर्वेक्षण- 2026 के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी अभी साफ हवा के लक्ष्य से काफी दूर है. 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले 48 शहरों की रैंकिंग में दिल्ली 172 अंक के साथ 21वें स्थान पर रही. पिछले साल राजधानी 32वें स्थान पर थी. इस सूची में लखनऊ 198 अंक के साथ पहले और इंदौर 197 अंक के साथ दूसरे नंबर पर रहे. दिल्ली के लिए बड़ा सवाल प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं पर मिलने वाली राशि के इस्तेमाल को लेकर भी है.
2020- 21 से 2025- 26 के बीच राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत करीब 113 करोड़ रुपये मंजूर किए गए और 99.77 करोड़ रुपये आवंटित हुए. 23 दिसंबर 2025 तक इसमें से 81.36 करोड़ रुपये जारी किए गए, लेकिन खर्च करीब 14 करोड़ रुपये ही हुआ. ऐसे में जारी रकम का लगभग 17 प्रतिशत ही इस्तेमाल किया जा सका.
बढ़ाई गई निगरानी
प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित 13 हॉटस्पॉट में सड़क की धूल पर नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव और मिस्ट स्प्रे सिस्टम लगाए गए हैं. ओखला, द्वारका, अशोक विहार, बवाना, नरेला, मुंडका, पंजाबी बाग, वजीरपुर, रोहिणी, विवेक विहार, आनंद विहार-मंडोली, आरके पुरम और जहांगीरपुरी में इन उपायों पर जोर दिया गया है. ऊंची इमारतों में एंटी- स्मॉग गन लगाने की व्यवस्था की गई है. दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 156 मशीनें लगाई जा चुकी हैं.
मॉनिटरिंग नेटवर्क
वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए छह नए केंद्र जुड़ने के बाद दिल्ली में कुल 46 स्टेशन हो गए हैं. हालांकि विशेषज्ञों ने इनके भौगोलिक वितरण पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि बाहरी इलाकों की तुलना में मध्य और दक्षिणी दिल्ली में निगरानी नेटवर्क ज्यादा केंद्रित है. 2025 में पीएम 2.5 और पीएम 10 का वार्षिक स्तर 2018-2025 की अवधि में 2020 को छोड़कर सबसे कम रहा. इसके बावजूद प्रदूषण सुरक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्थायी सुधार के लिए हॉटस्पॉट आधारित योजना, एनसीएपी फंड की नियमित समीक्षा, सड़क धूल पर स्थायी समाधान और वाहन- उद्योग प्रदूषण के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करना जरूरी है.
दिल्ली की रैंकिंग
| वर्ष | दिल्ली की रैंक | स्कोर |
|---|---|---|
| 2026 | 21वीं | 172 |
| 2025 | 32वीं | 157.3 |
| 2024 | 11वीं | 181 |
| 2023 | 9वीं | 177 |
