चंडीगढ़ | हरियाणा के करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ती नजर आ रही है. सरकारी स्कूलों में करीब 20-21 वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों के मामलों की अब व्यक्तिगत स्तर पर जांच की जा रही है. हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड जुटाकर उनकी पात्रता और कानूनी स्थिति की पड़ताल शुरू कर दी है. शिक्षा निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को गेस्ट टीचरों से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं.
इनमें नियुक्ति पत्र, नियुक्ति की तारीख और प्रकृति, कार्यग्रहण, सेवा की निरंतरता, पद की स्वीकृति, सेवा में ब्रेक और शैक्षणिक योग्यता सहित अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं. प्रत्येक शिक्षक के मामले में अलग से ‘स्पीकिंग रिपोर्ट’ तैयार होगी.
शिक्षकों से मांगे गए दस्तावेज
यह पूरी प्रक्रिया 16 जून 2014 की सरकार की नियमितीकरण नीति और सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के मदन सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा सरकार मामले में दिए फैसले को आधार बनाकर की जा रही है. अधिकारियों को रिपोर्ट तय समय में और सभी कानूनी पहलुओं के साथ भेजने को कहा गया है. नारनौल में पीजीटी गेस्ट टीचरों को अपने मूल रिकॉर्ड के साथ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं. उनसे नियुक्ति और कार्यग्रहण आदेश, स्थानांतरण या कार्य परिवर्तन आदेश, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, मूल सेवा पंजिका, मेरिट दस्तावेज और पुलिस वेरिफिकेशन समेत रिकॉर्ड मांगा गया है. हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगने की संभावना जताई गई है. रिकॉर्ड भेजने में लापरवाही पर अधिकारी या कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय हो सकती है.
सेवाकाल में 38 गेस्ट टीचरों की मौत
गेस्ट टीचरों के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान के अनुसार कैथल में पिछले 17 दिनों में चार अतिथि अध्यापकों की सेवाकाल के दौरान मौत हुई है, जबकि जिले में अब तक यह आंकड़ा 38 तक पहुंच गया है. राजकीय माध्यमिक विद्यालय दुब्बल के सोशल स्टडीज शिक्षक सोहन सिंह राणा का भी हृदयाघात से निधन हुआ. वह 21 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे थे. शिक्षक नेताओं मैना यादव, कृष्ण धारसूल, राजेंद्र शास्त्री, कुलदीप झरौली, पारस शर्मा और नरेंद्र संधू ने दिवंगत शिक्षकों के परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता देने की मांग सरकार से की है.
