करनाल | हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को डा. मंगलसेन सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय प्रगतिशील किसान सम्मेलन में तीन अहम योजनाओं का ऐलान किया. कृषि मंत्री जेपी दलाल भी विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे. संवाद के दौरान सबसे पहली चर्चा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सीएम ने बताया कि इस योजना के तहत 10 एकड़ के ऊपर , पांच से 10 एकड़ और 5 एकड़ से नीचे भूमि पर खेती करने वाले हमारे प्रगतिशील किसानों को शामिल किया जाएगा. इस दौरान सभी जिलों के अधिकारियों को प्रगतिशील किसानों का डाटा एक जगह एकत्रित करने के लिए भी निर्देश जारी कर दिए जाएंगे.
इस योजना की व्याख्या करते हुए सीएम ने कहा कि इस योजना के तहत विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी. इनमें पहला पुरस्कार प्राप्त करने वाले को 5 लाख रुपए, दूसरा ₹ 3 लाख रुपए और तीसरा ₹100000 का इनाम भी रखा जाएगा. प्रतियोगिता के चलते 100 प्रगतिशील किसानों को 50- 50 हजार रुपए सांत्वना पुरस्कार के रुप में भी वितरित किए जाएंगे. योजना का खाका क्या रहेगा, इस पर सरकार काम करेगी.
माननीय मुख्यमंत्री जी ने दूसरी योजना का नाम कहा कि इस योजना के तहत एक प्रगतिशील किसान अपने नज़दीक के 10 किसानों को गोद लेगा. फिर इन किसानों को खेती बाड़ी के आधुनिक तौर तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर व प्रगतिशील बनें. ये सभी 10-10 और किसानों को जोड़ेंगे. इस प्रकार एक चेन बनेगी और हरियाणा के किसान खुशहाल होंगे. अंत में सभी किसान भाई एक साथ मिलकर एक चेन के रूप में काम करेगे व उन्हे किसी विपत्ति का सामना नहीं करना पड़ेगा.
अपनी सभी बातो को विराम देते हुए सीएम मनोहर लाल खट्टर जी ने अपनी आखिरी और तीसरी योजना पर अपने विचार सांझा किए और कहा कि यह किसान मित्र योजना होगी. इस योजना के तहत प्रगतिशील किसान 100 किसानों को गोद लेंगे. ये ऐसे किसान होंगे, जिनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं है किन्तु प्रगतिशील किसान उनका आर्थिक प्रबंधन दुरुस्त करने में मदद करेंगे. मित्र योजना में प्रगतिशील किसान अपने आसपास के किसानों को जोड़कर स्वनियोजित बनाएंगे. अच्छा कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को प्रदेश सरकार की ओर से प्रोत्साहित किया जाएगा जिससे उनमें आत्मविश्वास का भरपूर संचार होगा.
प्रदेश में 700 वीटा दूध विक्रय केंद्र से बढ़ाकर होंगे 4000
सीएम ने कहा कि प्रदेश में इस समय वीटा के 700 दूध विक्रय केंद्र हैं. इनकी संख्या बढ़ाकर 4000 की जाएगी. इससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा और लोगों को अच्छी गुणवत्ता का दूध आसानी से उपलब्ध होगा व रोजगार में भी बढ़ोतरी होगी.
