अंबाला | हरियाणा के अंबाला (Ambala) छावनी में स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में भक्तों की गहरी आस्था है. यहां 15 दिवसीय बासड़ा मेले का आयोजन किया जा रहा है. सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर में माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहां बासी खाने का भोग माता रानी को चढ़ाया जाता है, जिसके बाद इसे प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस प्रसाद को खाने से शरीर की कई बीमारियां दूर हो जाती हैं.
होली के बाद लगता है मेला
मंदिर कमेटी के सदस्य महेश ने जानकारी देते हुए बताया कि हर साल होली के बाद बासड़ा का मेला लगता है. इस दिन को हरियाणा और पंजाब में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर में माथा टेकने के लिए पहुंचना शुरू कर देते हैं. माता शीतला की पूजा की जाती है, जिन्हें बच्चों की सेहत और सुरक्षा की देवी माना जाता है. इस दिन लोग अपनी कुलदेवी को ठंडा भोजन भोग में चढ़ाते हैं, ताकि माता ठंडी रहकर उन पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें.
1935 में हुई थी मंदिर की स्थापना
मंदिर कमेटी के सदस्य सुनील ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1935 में हुई थी. तब से हर साल दूर- दूर से श्रद्धालु यहां माथा टेकने के लिए आते हैं. हर साल होली के बाद यहां मेले का आयोजन किया जाता है. इस दौरान लोग बासी खाने का भोग माता शीतला रानी को लगाते हैं. यह मेला लगभग 15 दिनों तक चलता है, जिसमें भक्त माता रानी की पूजा- अर्चना करते हैं. वैसे तो हर दिन यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन सोमवार और मंगलवार को आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक होती है.
