नवरात्रि के पहले दिन उमड़ी आस्था की भीड़, 300 साल पुराने मां अंबिका देवी मंदिर में भक्तों का सैलाब

अंबाला | देशभर में जैसे ही नवरात्रि की शुरुआत हुई. मंदिरों और गली- मोहल्लों का माहौल पूरी तरह भक्ति में रंग गया. सुबह होते ही घरों में कलश स्थापना की तैयारियां शुरू हो गईं. वहीं, मंदिरों में घंटियों की आवाज और जय माता दी के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. कई जगहों पर श्रद्धालुओं ने घर के बाहर रंगोली बनाई और पूजा के लिए फल- फूल व प्रसाद की व्यवस्था की. छोटे-छोटे बाजारों में नारियल. चुनरी और माता के श्रृंगार का सामान खरीदने वालों की भीड़ नजर आई.

Chaitra Navratri Durga

महिलाएं और बच्चे नए कपड़ों में सजे दिखाई दिए तो कई श्रद्धालु सुबह- सुबह मंदिरों में माथा टेकने निकल पड़े. नवरात्रि का पहला दिन पूरे देश में उत्साह. आस्था और परंपरा के रंगों से भर गया.

पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. पहले दिन देवी के रूप शैलपुत्री की आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि माता शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और शक्ति का पहला स्वरूप मानी जाती हैं. श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद विधि-विधान से पूजा करते हैं और सुख- समृद्धि की कामना करते हैं. मंदिरों में भी विशेष आरती और पूजा का आयोजन किया जाता है. जहां भक्त लंबी कतारों में दर्शन के लिए खड़े दिखाई देते हैं.

मां अंबिका देवी मंदिर

हरियाणा के अंबाला में स्थित मां अंबिका देवी मंदिर नवरात्रि के दौरान आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. यह मंदिर करीब 300 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसी देवी के नाम पर शहर का नाम अंबाला पड़ा. मंदिर की वास्तुकला भी लोगों को आकर्षित करती है. इसकी दीवारों और छत पर बनी पुरानी पेंटिंग और कलाकृतियां उस दौर की शानदार कारीगरी की झलक देती हैं. मंदिर के पुजारी जतिन शर्मा बताते हैं कि मां अंबिका देवी को आदिशक्ति का रूप माना जाता है.

पौराणिक कथाओं के अनुसार. उन्होंने दुर्गम नामक राक्षस का वध किया था. इसी कारण उन्हें देवी दुर्गा का स्वरूप भी कहा जाता है. खास बात यह है कि इस मंदिर में देवी की पूजा पिंडी रूप में होती है. श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि देश के अलग- अलग हिस्सों से भक्त यहां माथा टेकने आते हैं.

खास श्रृंगार और पूजा

नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष सजावट की जाती है. इस बार देवी के श्रृंगार के लिए खास फूल कोलकाता से मंगवाए गए हैं. हर दिन माता का अलग- अलग रूप में श्रृंगार किया जाएगा. शाम के समय ड्राई फ्रूट से भी माता का विशेष श्रृंगार किया जाता है. बाद में वही प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है. इस दौरान मंदिर परिसर में भजन- कीर्तन और आरती का माहौल भी भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव कराता है.

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु राजेश डोगरा बताते हैं कि वह बचपन से यहां आ रहे हैं और उनके परिवार की पीढ़ियां भी इस मंदिर से जुड़ी रही हैं. उनका कहना है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक वह रोज सुबह- शाम माता के दर्शन करेंगे. रेखा देवी का कहना है कि मां अंबिका देवी में उनकी गहरी आस्था है और अब तक उन्होंने जो भी प्रार्थना की. वह पूरी हुई. नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही वह पहले मंदिर में दर्शन करती हैं और उसके बाद घर पर कलश स्थापना करती हैं. यही आस्था और विश्वास इस मंदिर को नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खास बना देता है.

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Sanjucta Pandit
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर कंटेंट एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.