हरियाणा में किसानों को नहीं आंदोलन से सरोकार, सिर्फ नहर के पानी की लड़ाई

भिवानी । हरियाणा का लीलस गांव राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है. लोहारू विधानसभा क्षेत्र में भिवानी जिले का यह लीलस गांव आता है. यहां का भू-जल खारा है. इसलिए बुजुर्गों, नौजवानों और किसानों की लड़ाई केवल नहर के पानी के लिए है. इन्हें किसान आंदोलन से कोई ज्यादा सरोकार नहीं है. इनकी कहानी केवल पानी से आरंभ होकर पानी पर ही समाप्त हो जाती है. अधिकतर टिब्बा और कुछ समतल भूमि वाले इस क्षेत्र की सैकड़ों किला जमीन को जैसे ही पानी की सप्लाई होने लगेगी तो यह भूमि सोना उगलेगी. अचानक पैदावार में भी वृद्धि होगी और जमीन के दाम भी बढ़ जाएंगे.

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गांव की मिट्टी को मिला प्राकृतिक वरदान, बस है पानी की कमी

लीलस के साथ लगते गांव से सैनिवास, बुधसेली, गेंडावास आदि की मिट्टी रेतीली है, परंतु बहुत ही उपजाऊ है. अच्छी पैदावार के लिए इसे सिर्फ और सिर्फ नहर के पानी की आवश्यकता है. अभी इन गांव में सरसों, चना और कहीं-कहीं गेहूं की खेती हो रही है. यहां की फसलों में ना के बराबर यूरिया डाला जाता है, इसलिए यहां के अनाज का स्वाद कुछ अलग ही है. यह क्षेत्र केवल और केवल बारिश के जल पर ही आश्रित हैं . लीलस की टेल तक मोतीपुरा माइनर से कुछ महीने पहले ही नहर का पानी पहुंचा है, लेकिन अभी सिंचाई आरंभ होना बाकी है. वाटर वर्कर्स के साथ ही बाकी के काम भी होने हैं, जिसके पश्चात खेत पानी से तर होंगे.

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पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के पश्चात हो गई बुरी हालत

दशकों से यहां पर सिंचाई की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी. यहां के पूर्व सीएम बंसीलाल के समय नहर का पानी तो आया, परंतु उनके पश्चात सभी नेहरे रेत के नीचे दब गई और पानी सरकारी फाइलों में गुम हो गया. अब किसान नई माइनर बनवाने के लिए अपनी भूमि तक को देने के लिए तैयार हैं. उन्होंने वर्तमान सरकार से ड्रिप सिंचाई योजना को अपनाने के लिए भी ऑनलाइन अप्लाई किया हुआ है. सैनीवास, लीलस, बुद्धसेली, गेंडावास आदि गांव के किसान रामस्वरूप, जगदीश, संतलाल, नेकीराम, दिलीप, सीताराम विश्नोई आदि का कहना है कि हर खेत तक सरकार नहर का पानी पहुंचाएं.

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वे अपनी भूमि की रजिस्ट्री को सरकार के नाम करने के लिए तैयार हैं. यदि मोतीपुरा माइनर का पानी खेतों तक पहुंच जाएगा तो उनका भाग्य उजागर हो जाएगा. खेत फिर से हरे भरे हो जाएंगे. युवाओं को इधर-उधर रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. एक साथ में बहुत सारी फसलें ले सकेंगे.

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