भिवानी | आज जहां एक ओर पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस को हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है. वहीं हरियाणा का एक गांव ऐसा भी है, जहां आज़ादी के 71 साल बाद तिरंगा फहराया गया. हालांकि इसके पीछे की कहानी गौरवशाली तो है ही, साथ ही दुख भरी भी है. 23 मार्च 2018 को आज़ादी के 71 साल बाद पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा इस गांव में पहली बार ध्वजारोहण किया गया.
1887 से है सम्बन्ध
दरअसल, इसके पीछे की कहानी को समझने के लिए हमें सन 1887 में पहुंचना होगा. यह वह दौर था जब अंग्रेजी हुकूमत भारत के लोगों पर अत्याचार कर रही थी. भिवानी जिले के रोहनात गांव में ग्रामीणों ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया. अंग्रेजों ने भी यहां के ग्रामीणों पर काफी जुल्म किया. जो ग्रामीण बच गए, उन्हें अंग्रेजों ने गांव से उठाकर हांसी स्थित एक सड़क पर ले जाकर रोड रोलर से कुचल दिया. आज भी इस सड़क को लाल सड़क के नाम से ही जाना जाता है.
ग्रामीणों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ किया संघर्ष
एक ओर जहां ग्रामीण अंग्रेजी हुकूमत से डटकर मुकाबला कर रहे थे, वहीं ग्रामीणों ने 12 अंग्रेज अधिकारियों को मार डाला. इससे बौखलाकर अंग्रेजी हुकूमत ने हिसार और उसके आसपास खून-खराबा करना शुरू कर दिया. 29 मई 1857 को ब्रिटिश सैनिकों ने रोहनात गांव में भयंकर उत्पात मचाया. ग्रामीणों ने जेली, लाठियों और गंडासियों से अंग्रेजी सैनिकों का मुकाबला किया, लेकिन अंग्रेजी हथियारों और तोपों के सामने वह ज्यादा देर न टिक सके.
अंग्रेजों ने किए अत्याचार
अंग्रेजों ने कई ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया. गांव वालों को पीने का पानी भी नहीं लेने दिया और कई लोगों को फांसी पर चढ़ा दिया. कई महिलाओं ने अपनी इज्जत बचाने के लिए गांव के कुएं में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी. अंग्रेजों ने ग्रामीणों की कृषि योग्य भूमि को नीलाम कर दिया और ग्रामीणों के नाम पर आज भी यह जमीन नहीं हो पाई है. अंग्रेजों ने ग्रामीणों से माफी मंगवाने के लिए गांव में अधिकारी भेजे, लेकिन ग्रामीणों ने साफ इनकार कर दिया.
आज़ादी के बाद भी अधूरी रही उम्मीदें
आज़ादी के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उनकी जमीन वापस मिल जाएगी, लेकिन आज़ादी के 71 साल बाद भी ऐसा नहीं हो पाया. इस कारण इस गांव में आज़ादी के काफी साल बाद तक तिरंगा नहीं फहराया जाता था. ग्रामीणों की मांग थी कि आज़ादी होने के 70 साल बाद भी उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. इसी के विरोध में उन्होंने 71 साल तक गांव में तिरंगा नहीं फहराया.
पूर्व मुख्यमंत्री ने की पहल
आखिरकार साल 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर गांव में पहुंचे और उन्होंने गांव में ध्वजारोहण किया. उन्होंने ग्रामीणों को विभिन्न व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाने के साथ उनकी जमीन भी वापस दिलाने का वायदा किया. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अभी भी सिर्फ गांव के स्कूल में ही तिरंगा फहराया जाता है, क्योंकि उनकी मांगे अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं.
