नई दिल्ली | आने वाला दौर मशीनों का होने वाला है. हर दिन नए- नए रोबोट और मशीन बनाई जा रही है जिससे मनुष्य का काम आसान हो पाए. स्कूल में आने वाले वक्त में विद्यार्थी मशीनों के साथ काम करेंगे, नए- नए स्किल सीखेंगे और पढ़ाई को सीधे जिंदगी से कनेक्ट कर पाएंगे. इसी बदलाव की दिशा में सेंट्रल बोर्ड का स्कूल एजुकेशन (CBSE) की तरफ से एक बड़ा फैसला किया गया है.
CBSE का बड़ा फैसला
अब सभी सीबीएसई स्कूलों में कॉम्पोजिट स्किल लैब बनाना कंपलसरी हो चुका है. यह निर्णय एनईपी 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के तहत किया गया है. इसका लक्ष्य यही है कि पढ़ाई ज्यादा प्रैक्टिकल और रोजगारपरक बन सके. नई व्यवस्था के बाद स्कूलों में पढ़ने के तरीके में काफी परिवर्तन होने वाला है. स्टूडेंट्स अब केवल परीक्षा के लिए नहीं बल्कि भविष्य के लिए तैयार किए जाएंगे.
आत्मनिर्भर बनेंगे छात्र
सीबीएसई के नए निर्देशों के अनुसार अब स्किल और वोकेशनल एजुकेशन को पढ़ाई का अहम हिस्सा बना दिया गया है. छात्र अब केवल थ्योरी नहीं पढ़ेंगे बल्कि कक्षा 6 से ही इलेक्ट्रिकल, आईटी, रिटेल, हेल्थ केवर जैसे क्षेत्रों से जुड़े बेसिक स्किल भी सीखेंगे. नई शिक्षा नीति के इस कदम से स्पष्ट है कि अब पढ़ाई का अर्थ सिर्फ नंबर लाना नहीं बल्कि हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनना भी होगा. ऐसे में आने वाले सालों में स्कूलों से निकलने वाले विद्यार्थी ज्यादा सक्षम व रोजगार के लिए तैयार दिखेंगे.
लैब का होगा निर्माण
सीबीएसई की ओर से स्कूलों को लैब बनाने के लिए फ्लैक्सिबिलिटी भी दी गई है. स्कूल चाहें तो कक्षा 6 से 12 तक के लिए 600 वर्ग फीट की एक कॉमन लैब बनाएं या दो अलग- अलग लैब बना सकते है. कक्षा 6 से 10 के लिए 400 वर्ग फीट और कक्षा 11- 12 के लिए 400 वर्ग फीट में लैब का निर्माण किया जा सकता है. नए स्कूलों के लिए यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू रहेगा.
इसका अर्थ है कि सीबीएसई से संबद्धता लेने के लिए स्किल लैब पहले से तैयार होनी अनिवार्य है. पहले से चल रहे स्कूलों को राहत देते हुए 22 अगस्त 2027 तक का टाइम दिया गया है. इस समय सीमा तक इन स्कूलों को लैब का निर्माण करना अनिवार्य रहेगा.
थ्योरी व प्रैक्टिकल का फासला
यह लैब केवल एक कमरा नहीं होगी, बल्कि छात्रों के लिए प्रयोगशाला जैसी होगी, जहां वे खुद प्रयोग करेंगे और सीखेंगे. यहां थ्योरी व प्रैक्टिकल का अंतर दिखेगा. लैब की मदद से छात्र जिंदगी में काम आने वाले कौशल सीख पाएंगे. सीबीएसई ने स्कूलों की सहायता के लिए विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की हैं जिसमें लैब का ढांचा, जरूरी उपकरण, सुरक्षा मानक व संचालन की योजना के बारे में बताया गया है. स्कूल अपनी आवश्यकता और बजट के मुताबिक उपकरण सिलेक्ट कर सकते हैं.
