हरियाणा में इस तकनीक से उपजाऊ बनेगी सेमग्रस्त भूमि, 8 लाख ट्यूबवेलों के पानी की होगी जांच

चंडीगढ़ | हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने पेयजल और सिंचाई पानी की गुणवत्ता जांच की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. प्रदेश सरकार द्वारा इसके लिए 8 लाख ट्यूबवेलों की जांच कराई जाएगी और नए वित्तीय वर्ष में लगभग 3 लाख ट्यूबवेलों के पानी की जांच कराने का लक्ष्य रखा गया है.

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उपजाऊ बनेगी सेमग्रस्त भूमि

प्रदेश सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि जांच से पता चल सकेगा कि पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन और बैक्टीरिया कितनी मात्रा में हैं ताकि प्रदूषकों को दूर किया जा सकें. आगामी 1 वर्ष में गुरुग्राम, झज्जर, रोहतक और भिवानी सहित कई अन्य जिलों में 1.40 लाख सेमग्रस्त भूमि को खेती के लायक बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे.

उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा केंद्र सरकार के सहयोग से साल 2029 तक करीब 4.21 लाख एकड़ जमीन को सेमग्रस्त बनाने की योजना बनाई है. मौजूदा वित्तीय वर्ष में 1 लाख एकड़ जमीन सुधार के लक्ष्य के विपरीत अब तक 92 हजार एकड़ जमीन को कृषि योग्य बनाया जा चुका है. जिन भी गांवों में यह समस्या है वहां वर्टिकल और सब सरफेस ड्रेनेज तकनीक के माध्यम से जमीन को खेती लायक बनाने में सफलता हासिल हो रही है.

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मछली पालन को बढ़ावा

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि सरकार सेमग्रस्त जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए गंभीरता से हरसंभव प्रयास कर रही है और अनुदान आधारित योजनाएं बनाकर किसानों को राहत पहुंचाने का काम किया जा रहा है. सेमग्रस्त या लवणीय भूमि से किसान दूसरे लाभ प्राप्त कर सकें, इसके लिए कई तरह की योजनाएं चलाई गई है. सरकार द्वारा सेमग्रस्त या खारे पानी वाले क्षेत्रों में मछली पालन और झींगा पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके लिए किसानों को तगड़ी सब्सिडी दी जा रही है.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.