चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार (Haryana Govt) कैदियों के मानसिक और सामाजिक विकास के लिए उन्हें शिक्षा की ओर अग्रसर कर रही है. अब पहले से ज्यादा कैदी शिक्षित हो रहे है. हरियाणा जेल महानिदेशक आलोक राय के अनुसार वर्तमान वर्ष में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल (NIOS) के तहत 10वीं कक्षा में 550 कैदी, 12वीं कक्षा में 377 कैदी और वेल्डिंग कोर्स में 20 कैदी नामांकित हुए है. वही, इग्नू के माध्यम से ग्रेजुएशन के 704, पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए 16 और सर्टिफिकेट कोर्स के लिए 134 कैदियों ने नामांकन कराया है.
1900 से अधिक ने पास की परीक्षा
जेल महानिदेशक ने बताया कि पिछले 14 वर्षों में 1138 कैदियों ने 10वीं, 771 ने 12वीं कक्षा पास की है, जबकि 20 कैदियों ने व्यवसायिक कोर्स पूरे किए है. उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य है कि जो कैदी अंगूठा लगाकर जेल के अंदर आते है, वे शिक्षा प्राप्त करके साइन करके बाहर जाएं और उन्हें सुधार का दूसरा अवसर मिले. साक्षरता न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी बल्कि जेलों में अनुशासन और शांति बनाए रखने में भी सहायक होगी. कई बार पढ़े- लिखे कैदी ही दूसरे कैदियों को पढ़ने में मदद करते है और उन्हें नैतिक शिक्षा भी दी जाती है.
5 जेलों में शुरू हुए कोर्स
हरियाणा की 5 जेलों गुरुग्राम, अंबाला, करनाल, पानीपत और फरीदाबाद में स्किल डेवलमेंट और पॉलिटेक्निक कोर्स शुरू किए जा चुके है. इन जेलों में कक्षाओं के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवा दिए गए है. इसके लिए जेल विभाग और हरियाणा कौशल रोजगार निगम ( HKRN ) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इस पर जेल विभाग के चीफ प्रोबेशन ऑफिसर विशाल सिंह और HKRN की GM अंबिका पटियाल ने हस्ताक्षर किए.
रोजगार की दिशा में कदम
जेल प्रशासन का मानना है कि शिक्षा से कैदियों का न केवल मानसिक विकास होगा, बल्कि रोजगार के क्षेत्र में भी अवसर मिलेंगे. शिक्षा के जरिए उन्हें अपराध की दुनिया से बाहर निकलकर साकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित कराना है. इससे वे जिम्मेदार नागरिक बनेंगे और समाज में उनका पुर्नवास आसान होगा.
