गाय के निधन पर नम हुईं आंखें, 18 साल साथ रही ‘नंदिनी’ को परिवार ने पूरे सम्मान से दी अंतिम विदाई

सोनीपत | जिले के हसनयारपुर तिहाड़ा कलां गांव में एक ऐसी विदाई देखने को मिली जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. करीब 18 वर्षों तक परिवार का हिस्सा रही ‘नंदिनी’ गाय के निधन पर तिहाड़ा परिवार ने उसे किसी पशु की तरह नहीं बल्कि घर के सदस्य की तरह सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी. आषाढ़ मास की सप्तमी (7 जुलाई) पर पूरे परिवार ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित की, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक रीति -रिवाजों से अंतिम संस्कार किया और पूरे सम्मान के साथ समाधि दी. अंतिम दर्शन के लिए गांव के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे. परिवार ने बताया कि नंदिनी की स्मृति में हवन और गौ- भोज का आयोजन भी किया जाएगा.

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मनजीत तिहाड़ा ने बताया कि करीब 18 साल पहले उनके भाई मेहरबान गांव महलाना स्थित रिश्तेदारी से नंदिनी की मां को घर लेकर आए थे. उस समय नंदिनी महज तीन महीने की बछड़ी थी. धीरे- धीरे वह पूरे परिवार का हिस्सा बन गई. करीब 16 साल पहले प्रसव के दौरान उसकी मां की मौत हो गई.

गाय के निधन पर नम हुईं आंखें

उस समय नंदिनी केवल दो साल की थी. इसके बाद, पूरे परिवार ने उसकी देखभाल बेटी की तरह की और कभी उसे अकेला महसूस नहीं होने दिया. उस समय घर में कोई बेटी नहीं थी इसलिए नंदिनी से उनका रिश्ता और भी गहरा हो गया. बाद में परिवार में बेटी का जन्म जरूर हुआ लेकिन तब तक नंदिनी हर सदस्य के दिल में खास जगह बना चुकी थी. घर के बच्चे उसके साथ खेलते थे और अपने पूरे जीवन में उसने कभी किसी बच्चे, बुजुर्ग या अन्य व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया.

12 संतानों को दिया जन्म

नंदिनी ने अपने जीवनकाल में 12 संतानों को जन्म दिया. इनमें से 6 गाय आज भी तिहाड़ा परिवार के पास हैं जबकि बाकी बछड़े और बछड़ियां परिवार ने अपने मित्रों और परिचितों को दे दिए. परिवार आज भी उसी समर्पण के साथ सभी गौवंश की सेवा कर रहा है. करीब 1 साल पहले नंदिनी ने समय से पहले एक बछड़ी को जन्म दिया था जिसकी 1 सप्ताह पहले मौत हो गई. इसके ठीक एक सप्ताह बाद बीमारी के चलते नंदिनी ने भी दम तोड़ दिया. परिजनों के अनुसार, नंदिनी करीब साढ़े 3 महीने से बीमार थी. उसके इलाज के लिए कई डॉक्टरों से सलाह ली गई.

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दी अंतिम विदाई

आशंका जताई गई कि उसने लोहे का कोई टुकड़ा निगल लिया था जिससे उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई. इसके बावजूद, उसने आखिरी समय तक खाना नहीं छोड़ा. परिवार ने वैदिक रीति- रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया और समाधि में 31 किलोग्राम नमक डालकर मिट्टी दी. मनजीत तिहाड़ा ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय जय भगवान गौ सेवा और गौ रक्षा के लिए समर्पित थे जबकि दादा गुरु चंद्र दास ने परिवार को जीव रक्षा और सनातन धर्म के संस्कार दिए थे. नंदिनी ने वर्षों तक दूध, घी और छाछ देकर घर का पालन- पोषण किया इसलिए उसे सम्मानपूर्वक विदाई देना उनका धर्म और संस्कार था.

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Puja Kumari
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर कंटेंट एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.