चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से पूर्व सैनिकों के आश्रितों (डीईएसएम) के रिजर्वेशन को लेकर एक फैसला सुनाया है. यह निर्णय इनके लिए राहत भरा है. कोर्ट की ओर से स्पष्ट किया गया है कि डीईएसएम श्रेणी का लाभ ‘जीवन में सिर्फ एक बार’ जैसी कठोर व्याख्या के आधार पर छीना नहीं जा सकता, विशेषतौर पर तब जब भर्ती प्रक्रियाएं लंबे वक्त तक अटकी रहती हैं.
दो रिट का किया निपटारा
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की तरफ से ग्रिड सब स्टेशन ऑपरेटर (जीएसओ) पद से संबंधित 2 रिट का निपटारा किया गया व हरियाणा बिजली वितरण कंपनी की तरफ से नियुक्ति रद्द करने के आदेश को खारिज कर दिया गया. कोर्ट द्वारा निर्देश दिए गए कि याचिकाकर्ता को जीएसओ पद पर नियुक्ति दी जाए, उसे वरिष्ठता व नोटेशनल पे के साथ सभी लाभ प्रदान किए जाएं.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व कानूनी देरी की वजह से अगर कोई कैंडिडेट इस बीच किसी अन्य पद पर नौकरी ज्वॉइन करता है तो इसके लिए उसे दंडित नहीं किया जा सकता.
रिजर्वेशन का अधिकार समाप्त नहीं
डीईएसएम पात्रता उस तारीख के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए, जब कैंडिडेट ने अप्लाई किया था और वह उस समय एलिजिबल था. कोर्ट द्वारा 11 जनवरी 2001 को हरियाणा राज्य सैनिक बोर्ड की ओर से जारी दिशा- निर्देशों को अलग- थलग पढ़ने से इनकार किया.
कोर्ट ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 14 अगस्त 2014 के स्पष्टीकरण और हरियाणा सरकार के 13 अप्रैल 2022 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि नौकरी ज्वॉइन करने से पहले अगर कैंडिडेट ने कई पदों के लिए आवेदन किया है तो किसी एक पद पर नियुक्ति मिलने से अन्य भर्तियों में रिजर्वेशन का अधिकार समाप्त नहीं होता.
कोर्ट ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड की ये दलील भी खारिज कर दी कि क्लर्क पद ज्वॉइन करने के बाद याचिकाकर्ता डीईएसएम नहीं रहा. कोर्ट की ओर से कहा गया कि ऐसी व्याख्या पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों के रोजगार के अधिकारों पर प्रभाव डालेगी.
