चंडीगढ़ | गर्भावस्था के दौरान अगर अचानक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ जाए तो परिवार की सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि समय पर सही अस्पताल और डॉक्टर मिल जाए. कई बार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किए जाने में भी समय निकल जाता है. अब हरियाणा में ऐसी परेशानी को कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं की देखभाल से जुड़ी नई व्यवस्था शुरू की गई है. बता दें कि स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समृद्धि, सुरक्षित मातृत्व और बाल स्वास्थ्य पहल की शुरुआत की है.
इसके तहत, गर्भवती महिलाओं को उनकी जोखिम श्रेणी के हिसाब से सही स्वास्थ्य केंद्र के साथ पहले से टैग किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर और लाभार्थी के अनुरोध पर इसमें निजी स्वास्थ्य केंद्र को भी शामिल किया जा सकेगा.
प्रेग्नेंसी से लेकर डिलीवरी तक नजर
समृद्धि तकनीक पर आधारित व्यवस्था है. इसके जरिए गर्भवती महिलाओं, खासकर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की लगातार निगरानी की जाएगी. गर्भवती महिला के प्रसवपूर्व रजिस्ट्रेशन से लेकर डिलीवरी और जन्म के बाद 42 दिनों तक देखभाल को ट्रैक किया जाएगा. इसका मकसद जरूरत पड़ने पर महिला को सही समय पर सही स्तर की स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचाना है.
गर्भवती महिला की बनेगी यूनिक ID
इस योजना में पोर्टल पर गर्भवती महिला का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा. रजिस्ट्रेशन के बाद महिला की एक यूनिक समृद्धि ID तैयार की जाएगी. इसके जरिए सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलने वाली सेवाओं का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा. वहीं, ऑटोमेटेड अलर्ट और ड्यू लिस्ट के जरिए ANM और मेडिकल अधिकारियों को जांच, फॉलो-अप और डिलीवरी की तैयारी से जुड़ी जानकारी समय पर मिल सकेगी. हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के 10वें से 12वें सप्ताह के बीच जांच और जरूरी देखभाल के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के शिविर में भेजा जाएगा.
मिलेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर
प्रदेश की 11 प्रथम रेफरल इकाइयों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी भी की गई है. यहां बुधवार और शनिवार को स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इनमें अंबाला का CHC चौरमस्तपुर, भिवानी का SDH लोहारू, फतेहाबाद के CHC भट्टू कलां और भूना, गुरुग्राम का SDH पटौदी, झज्जर के SDH मातनहेल और CHC छारू, जींद का CHC अलेवा, नूंह का CHC पिनगवां और रेवाड़ी के CHC बावल व नाहर शामिल हैं.
प्रदेश में कुल 101 प्रथम रेफरल इकाइयां हैं. विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए हर बुधवार वॉक-इन वर्चुअल इंटरव्यू भी किए जा रहे हैं और अब तक 84 विशेषज्ञों की नियुक्ति को अंतिम रूप दिया गया है.
