चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. जिसके तहत, 6 प्रमुख शहरों में बड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे. इसके लिए करीब 35 हजार एकड़ जमीन की जरूरत होगी. बता दें कि यह जमीन पारंपरिक अधिग्रहण प्रक्रिया से नहीं ली जाएगी, बल्कि किसानों की सहमति से ही जुटाई जाएगी.
पोर्टल से होगी जमीन की पेशकश
सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे चाहें तो अपनी जमीन सीधे ई- भूमि पोर्टल पर पेश कर सकते हैं. इस दौरान जमीन की कीमत तय करने का अधिकार भी किसान के पास होगा, यानी किसान अपनी मर्जी से तय करेगा कि वह जमीन देगा या नहीं. यदि देगा तो किस कीमत पर सरकार और किसान के बीच बातचीत के बाद ही सौदा पक्का होगा. इस प्रक्रिया में किसी तरह का दबाव या मजबूरी नहीं होगी.
हाईकोर्ट में चुनौती
इतनी बड़ी मात्रा में जमीन जुटाने की इस कवायद पर अब कानूनी पेच फंस गया है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर याचिका दायर हुई है. कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस भी जारी किया है. इसके बाद, किसानों और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. सरकार का कहना है कि ई- भूमि नीति से किसान मजबूरी में अपनी जमीन नहीं देंगे, बल्कि वह बराबरी की शर्तों पर विकास का हिस्सा बनेंगे. इससे राज्य में उद्योग बढ़ेंगे, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को अपनी जमीन का सहित दाम मिलेगा.
