चरखी दादरी: 11 साल पहले पारंपरिक खेती छोड़ शुरू की जैविक खेती, आज किसान सुरेंद्र हुआ मालामाल

चरखी दादरी | पारंपरिक खेती आज भी किसानों के मन में बसी हुई है, जिस वजह से किसान (Farmer) अन्य खेती नहीं कर पाते हैं. हरियाणा के चरखी दादरी जिला के घसोला गांव के रहने वाले सुरेंद्र सिंह (Surendra Singh) को निजी क्षेत्र में नौकरी तो मिल गई थी, लेकिन परिवार का भरण- पोषण करना मुश्किल हो रहा था. करीब 11 साल पहले उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पारंपरिक खेती छोड़कर जैविक खेती करने का फैसला किया.

Charkhi Dadri Surendra Kumar

इस तरह करते हैं खेती

जैविक खेती और मार्केटिंग के गुर सीखने के लिए सुरेंद्र ने कार्यशाला में हिस्सा लिया और खेती का नया तरीका सीखा. अब वह करीब डेढ़ एकड़ में गाय के गोबर से घर में बनी खाद से एक सीजन में 4 सब्जियां पैदा कर दोगुनी कमाई कर रहे हैं. किसान सुरेंद्र कुमार ने प्राइवेट सेक्टर की नौकरी छोड़कर रेतीली जमीन पर सब्जियों की जैविक खेती शुरू की. सुरेंद्र कुमार की मेहनत रंग लाई है और वह एक प्रगतिशील किसान की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं.

उन्होंने अपने खेत में बिना किसी रासायनिक खाद के गाय के गोबर से बनी खाद से सब्जियों के बीज और पौध भी तैयार की है. किसान ने मेलों में सब्जियों से होने वाली कमाई की मार्केटिंग भी सीखी. सुरेंद्र अन्य किसानों को भी जैविक खेती के प्रति जागरूक कर रहे हैं. उन्होंने हरियाणा सरकार की योजनाओं का लाभ उठाते हुए खेतों में सोलर सिस्टम के अलावा सिंचाई और मल्चिंग भी लगाई है.

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कृषि विभाग ने किसान के जुनून को सराहा

किसान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि परिवार चलाने के लिए उन्हें आधुनिक खेती की जानकारी सरकारी किसान पाठशाला से मिली. बताया कि वह एक सीजन में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की चार फसलें उगाकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. यह भी बताया कि रोज सुबह 2- 3 घंटे और शाम को भी इतने ही घंटे मेहनत करनी पड़ती है. यह कमाई का बेहतर विकल्प है. कृषि विभाग ने किसान के जुनून की सराहना करते हुए अन्य किसानों को भी ऐसी खेती करने की सलाह दी है. उन्होंने सरकारी किसान पाठशालाओं से सीख ली और अब सब्जियों के अलावा अन्य फसलें बोकर दोगुना मुनाफा कमा रहे हैं.

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Pravesh Chauhan
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मेरा नाम प्रवेश चौहान है. मीडिया लाइन में पिछले 4 वर्ष से काम कर रहा हूँ. मैंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की है.