हरियाणा में अब हर साल बढ़ेगी ट्यूशन फीस, अभिभावक हुए परेशान

फरीदाबाद । कोरोना के दौर में ऐसा लगातार सुनने को मिला कि बिना पढ़ाई के भी कई स्कूलों ने अभिभावकों से पूरी फीस वसूली. कई तरहों की शिकायतें इस दौरान सुनने और देखने को मिली, कई सरकारों ने तो कई-कई महिनों की फीस माफ भी करवाई. लेकिन हरियाणा सरकार ने अब शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है.

school student

शिक्षा नियमावली 2003 में राज्य की सरकार ने संशोधन करके प्राइवेट स्कूलों को हर साल ट्यूशन फीस में 8 से 10 फीसदी की बढ़ोत्‍तरी करने की कानूनी अनुमति दे दी है. इसके अलावा अन्य फंडों में भी फीस वसूलने की अनुमति दी है. राज्य सरकार के इस फैसले का अब अभिभावक जमकर विरोध करने में लगे हैं. अब ये बात अभिभावक मंच तक जा पहुंची है. हरियाणा अभिभावक एकता मंच का आरोप है कि सरकार दबाव में ये काम कर रही है. सरकार ने ये नियम प्राइवेट स्कूलों की सशक्त लॉबी के दबाव में बनाए हैं.

अभिभावकों का कहना है कि हम नियमों का विरोध जताने की तैयारी कर रहे हैं. नए कानूनों के विरोध में आगे की रणनीति तय करने के लिए प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है साथ ही सभी जिलों के अभिभावक संगठनों से अपील की गई है कि वे नए नियमों के विरोध में अपना प्रस्ताव पारित करें. अपने प्रस्ताव को मुख्यमंत्री,शिक्षा मंत्री को भेजें. अभिभावकों का कहना ये भी है कि सरकार का फैसला पूरी तरह से स्कूलों के हित में है छात्रों के हित में नहीं. इससे प्राइवेट स्कूलों की लूट व मनमानी को कानूनी मंजूरी दी जा रही है. शिक्षा को सिर्फ व्यवसाय बनाया जा रहा है. वहीं अभिभावकों का आर्थिक व मानसिक शोषण हो रहा है.

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इस मामले में देशभर के अलग-अलग अभिभावक संगठन अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन (IPA) के जिला अध्यक्ष का कहना है कि RIT के माध्यम से फरीदाबाद और गुरुग्राम के 100 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों में काफी संख्या में रिजर्व व सरप्लस फंड मौजूद है. लगभग सभी स्‍कूलों को मुनाफा मिल रहा है. अब ऐसे में जहां एक ओर देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और देश की शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है ऐसे में सरकार का ये फैसला छात्रों के भविष्य को लेकर क्या निर्णय लेगा ये देखना बाकी है.

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