मलबे में फंसे लोगों को चुटकियों में ढूंढना होगा आसान, फरीदाबाद के स्टूडेंट्स ने बनाया खास तरह का स्पाइडर रोबोट

फरीदाबाद | औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के छात्रों ने बड़ा ही गौरवमई काम किया है. फरीदाबाद के लिंगायस विद्यापीठ के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस और इजीनियरिंग डिपार्टमेंट के छात्रों ने मिलकर कमाल का काम किया है. इन छात्रों ने स्पाइडर रोबोट, रोबोटिक हैंड, ड्रोन समेत कई अनोखी चीजों को बनाया है. प्रोफेसर ने बताया कि हमारे यहां इन छात्रों को पूरा सपोर्ट किया जाता है. हमे गर्व है कि लिंगायस विद्यापीठ के छात्र अपने साथ साथ संस्थान का नाम भी रोशन कर रहे है.

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क्या है स्पाइडर रोबोट?

B.Tech 2nd Year की छात्रा प्रज्ञा सिंह और B.Tech 1st Year की छात्रा अन्वी ने बताया कि हमने एक स्पाइडर रोबोट बनाया है, जो बिलकुल स्पाइडर की तरह दिखता है और उसी तरह चलता है. इसका उपयोग तब किया जाता है, जब लोग पत्थर व मलबे के नीचे दब जाते है और रेस्क्यू टीम वहां तक नहीं पहुंच पाती है. ऐसे में स्पाइडर रोबोट वहां बढ़िया काम करता है. इसमें कैमरा लगा होता है, जो वहां की फुटेज के सकता है. इसमें AI तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसे बनाने में 2 से ढाई हजार रुपए तक का खर्चा आया है.

लैब इंचार्ज और BCA के छात्र आकाश वर्मा ने बताया कि Ist Year से मैं इन चीजों पर काम कर रहा हूं. ऑपरेशन सिंदूर के लिए भी ड्रोन बनाए थे. इसके अलावा हमने एक जैमर बनाया है जो 10 मीटर में किसी नेटवर्क को या ड्रोन को ब्लॉक कर सकता है. इसका प्रयोग सुरक्षा की दृष्टि से किया जा सकता है.

क्या है रोबोटिक हैंड?

रोबोटिक हैंड का इस्तेमाल कई चीजों में किया जा सकता है. रोबोटिक सर्जरी वाले हैंड्स में 2 ग्रिप बने होते है. इसमें हमने 5 ग्रिप बनाए है. एक ग्रिप में यानी एक उंगली से करीब 10 किलो तक का वजन रोबोटिक हैंड उठा सकता है. इसमें कैमरा भी लगा हुआ है. कैमरे की मदद से हमें इसका फीड अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में आसानी से देखने को मिलता है. मार्केट में जो रोबोटिक है उनकी कीमत लाखों रुपए है, लेकिन इसकी लागत सिर्फ 5 हजार रुपए है.

किसानों के लिए भी बनाई डिवाइस

छात्रों ने बताया कि हमने एक ऐसा यंत्र भी बनाया है, जो किसानों की मदद करेगा. इसका नाम हमने एग्रो साइंस AI दिया है. इस डिवाइस के जरिए किसान घर बैठे अपने खेतों में पानी दे सकता है. ये पूरी तरह AI मॉड्यूल पर काम करेगा. बाजार में इस तरह के डिवाइस की कीमत लाखों रुपए है लेकिन हमने इसे 12 हजार में तैयार किया है.

ट्यूमर बताने वाला सॉफ्टवेयर

BCA 3rd Year की छात्रा ने बताया कि उसने एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है जो MRI की कॉपी अपलोड करते ही यह बता देगा कि उसके ब्रेन में कौन-सा ट्यूमर है. कुछ लोगों को पता नही होता कि MRI में कौन सा ट्यूमर है या डॉक्टर अवलेबल नहीं होता तो ऐसे में व्यक्ति इसकी हैल्प ले सकता है.

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Anita Poonia
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मेरा नाम अनीता पूनिया है. मैं पिछले 2 साल से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हूँ. वर्तमान मे Haryana E Khabar न्यूज वेबसाइट के लिए कंटेंट राइटर का काम कर रही हूँ.