फतेहाबाद | हरियाणा के टोहाना विधानसभा क्षेत्र के गांव बिठमड़ा से शादी के दौरान एक बेहद ही काबिले- तारीफ खबर सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई तारीफ करता नहीं थक रहा है. यहां 21 दिसंबर को राममेहर नाम के एक शख्स की शादी थी जो न केवल गांव बल्कि आसपास के क्षेत्र में भी जमकर सुर्खियां बटोर रही है.
शादी में ठुकराई लाखों की धनराशि
बिठमड़ा गांव निवासी तारा के पुत्र की शादी गांव धमतान साहिब में तय हुई थी. 21 दिसंबर के दिन बारात गांव पहुंची और यहां सगाई की रस्म के दौरान लड़की वालों की ओर से 20 लाख रुपए नकद धनराशि, 10 तोला सोना और लाखों रूपए का फर्नीचर का सामान शगुन स्वरूप दहेज में दिया गया, लेकिन लड़के के पिता ने शगुन के तौर पर मात्र 1 रूपया व नारियल लेकर शादी की रस्मों को पूरा किया. उनकी इस सराहनीय पहल को देखकर वहां मौजूद हर शख्स ने तालियां बजाकर इसका स्वागत करते हुए खुले दिल से सराहना की.
दूल्हे के पिता 78 वर्षीय तारा सिंह मूलरूप से नारनौंद क्षेत्र के गांव खेड़ी चौपटा के रहने वाले हैं और मात्र ढाई साल की उम्र में अपने मामा के गांव बिठमड़ा में आकर बस गए थे. इस सराहनीय पहल की बदौलत मामा के गांव में आकर भांजे ने खूब नाम कमाया है.
दुल्हन ही सबसे बड़ा दहेज
तारा सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों की शादी भी बिना दान- दहेज के की थी और अब बेटे की शादी में भी इस परंपरा को कायम रखा है. एक बाप अपनी बेटी दे देता है, उससे बढ़कर दहेज और क्या हो सकता है. उन्होंने बताया कि उनकी भी 2 शादियां हुई थी और दोनों ही शादियां बिना दान- दहेज के की गई थी. उस समय भी दहेज में घड़ी, साईकिल जैसी चीजें दी जाती थी, लेकिन उन्होंने कभी इसका लालच नहीं किया. मेहनत की कमाई ही इंसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है.
दूल्हे राममेहर ने बताया कि पूरे परिवार ने पहले ही तय कर लिया था कि बिना दहेज के शादी की रस्मों को पूरा किया जाएगा. हमारे परिवार के संस्कार ही सदैव अच्छी चीजों की ओर रहे हैं. आज दहेज की वजह से बसे- बसाए घर उजड़ रहे हैं. ऐसे में हम सभी को अपने सामूहिक प्रयासों से इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करना होगा. इस तरह के उदाहरण समाज के सामने पेश किए जाएंगे तो अन्य लोग भी प्रेरित होकर अपने बेटे और बेटी का विवाह बिना दान- दहेज के करेंगे.
