गुरुग्राम | हरियाणा सरकार की बहुप्रतीक्षित जंगल सफारी योजना को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक विशेषज्ञ अरावली रेंज की परिभाषा साफ नहीं कर देते, तब तक किसी को भी अरावली को छूने की इजाजत नहीं होगी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला सिर्फ हरियाणा और राजस्थान की ही नहीं बल्कि यह एक रेंज हैं जो कई राज्यों से होकर गुजरती है. जंगल सफारी के मुद्दे पर तब विचार किया जाएगा जब कोर्ट अरावली रेंज पर मुख्य मामले पर विचार करेगी.
हरियाणा सरकार ने मांगी थी इजाजत
राज्य सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि जंगल सफारी योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को 10 हजार एकड़ से बदलकर 3 हजार एकड़ कर दिया गया है. ऐसे में उन्हें सेंट्रल एम्पावरड कमेटी (CEC) को जांच के लिए DPR देने की इजाजत दी जाए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम विशेषज्ञ नहीं है, विशेषज्ञ ही अरावली पहाड़ियों की परिभाषा तय करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही इस योजना पर काम किया जाए. बता दें कि गत वर्ष अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के प्रस्तावित मेगा अरावली जू- सफारी प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी थी. इसे दुनिया का सबसे बड़ा जू- सफारी माना जा रहा है. इस प्रोजेक्ट का मकसद गुरुग्राम और नूह जिले में इको- फ्रेजाइल अरावली रेंज में 10 हजार एकड़ क्षेत्र में बड़ी बिल्लियों के लिए ज़ोन बनाना और सैकड़ों तरह के पक्षियों, रेप्टाइल्स और तितलियों को बसाना है.
पर्यटकों की बढ़ी संख्या
गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में स्थित अरावली पहाड़ियों के प्रति पिछले कुछ सालों से पर्यटकों का रूझान बढ़ा है. यहां वीकेंड पर दिल्ली- NCR क्षेत्र से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. खासतौर पर युवाओं की भारी भीड़ रहती है. पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद यहां बड़ी संख्या में कैफे और रिसॉर्ट खुल गए हैं. सड़क किनारे अनेक अस्थाई फूड कोर्ट भी चल रहे हैं.
