हिसार | आधुनिकता के इस दौर में डिजिटाइजेशन का प्रचलन बहुत बढ़ चुका है. इसी कड़ी में हरियाणा सरकार के राजस्व विभाग ने अब गिरदावरी (फसल रिकॉर्ड) को हाईटेक बनाने की तैयारियां शुरू कर दी है. प्रदेश सरकार द्वारा इस बार डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) की शुरुआत की गई है.
नियम ऐसा है कि पटवारी को अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि खेत की मेड़ पर खड़े होकर फसल की 3 अलग- अलग फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड करनी होगी. इससे हेरा-फेरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.
हरियाणा में रुकेगा फर्जीवाड़ा
हरियाणा के 3312 गांवों और हिसार जिले के 175 गांवों को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना है. इन गांवों में सामान्य गिरदावरी के साथ DCS सर्वे किया जा रहा है. इसका मकसद यह देखना है कि क्या यह तकनीक पूरे जिले में लागू की जा सकती है. हालांकि, इस नई व्यवस्था पर पटवारी सवाल उठा रहे हैं. जिलेभर के पटवारियों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है. जिसको देखते हुए जिला प्रशासन ने दबाव कम करने के लिए अंडर ट्रेनी पटवारियों को मैदान में उतार दिया है.
पटवारियों के विरोध की वजह
- पटवारियों का कहना है कि मोबाइल ऐप्लिकेशन तभी खुलती हैं जब पटवारी संबंधित खसरे की बाउंड्री के भीतर खड़ा हो.
- खेतों में इंटरनेट सिग्नल नहीं मिलते, जिससे फोटो अपलोड करने में लंबा समय लग रहा है.
- एक- एक खेत पर जाकर 3 फोटो लेना और फिर उसे अपलोड करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है.
पुरानी और नई व्यवस्था में फर्क
- पुरानी व्यवस्था में पटवारी गांव में बैठकर या किसान से पूछकर एंट्री कर देता था. पुरानी व्यवस्था में हेरा-फेरी की गुंजाइश रहती थी. इसके चलते बीमा क्लेम में अक्सर विवाद होते थे.
- वहीं, नई व्यवस्था (DCS) में खेत के अंदर खड़े होकर फोटो खींचना अनिवार्य है. जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैंप से डेटा 100% सटीक होगा. अगर पाला या सूखा पड़ता है, तो खेत की फोटो पहले से पोर्टल पर होने के कारण कंपनी क्लेम नहीं रोक पाएगी. किसान वही फसल बेच पाएगा जो उसने वास्तव में बोई है, इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सकेगी.
DCS के दौरान आ रही दिक्कतों को लेकर पटवारी एसोसिएशन ने सरकार को अवगत करवाया है. इसमें कई मुद्दे उठाए गए हैं. मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म होने, सर्वर डाउन होने, हर खेत तक पहुंचना संभव नहीं हो रहा है. कहीं खेत में गन्ने की फसल खड़ी तो कहीं जंगल हैं, कैसे फोटो लेकर अपलोड किए जाएं – आजाद सिंह, जिला प्रधान, दी रेवेन्यू कानूनगो पटवार एसोसिएशन
