झज्जर | हरियाणा का झज्जर जिला इन दिनों विदेशी पक्षियों की चहक- महक से गुलजार हो उठा हैं. इन पक्षियों ने डीघल गांव में डेरा डाला हुआ है. इनमें बार हेडेड गूज पक्षी बेहद खास है, जो 29 हजार फीट उंचाई तक उड़ान भर सकता है. यह दुनिया की सबसे ऊंची उड़ान भरने वाले पक्षियों में से एक है.
दुर्लभ प्रजातियां पहुंची डीघल
डीघल गांव में इस बार दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी भी देखने को मिल रहें हैं. यहां गांव के आसपास जलभराव वाले क्षेत्रों में पक्षी प्रेमियों को दुर्लभ नजारा देखने को मिल रहा है. इसमें ग्रे लेग गूज, नॉर्थन पिनटेल, नॉर्थन शोवलर, गैडवाल, कॉमन पोचार्ड, कॉमन जैसे प्रजातियों के पक्षी देखने को मिल रहे हैं. ये पक्षी 200 से 1000 के समूह में हजारों किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचे हैं.
सर्द मौसम की बात करें, तो हिमाचल प्रदेश के आसपास ज्यादा बर्फबारी होने के चलते प्रवासी पक्षियों को भोजन मिलना मुश्किल हो जाता है. इसकी खोज में पक्षी वहां से उड़ान भरते हुए डीघल और जिले के आसपास के क्षेत्र में आ जाते हैं. इन पक्षियों का नवंबर महीने में आना शुरू होता है और मार्च में फिर से ये मूल क्षेत्रों की ओर निकल जाते हैं.
बार हेडेड गूज पक्षी खास
झज्जर के बर्ड वॉचर जगत ने बताया कि मैं 1986 से इस फील्ड में हूं. बार हेडेड गूज की खासियत बताते हुए उन्होंने बताया कि ये पक्षी साइबेरिया से आते हैं और इनमें सबसे ऊंची उड़ान भरने की क्षमता होती है. ये बहुत शांत पक्षी होता है और करीब 5 महीने यहां रूकने के बाद फिर वापस चला जाता है.
झज्जर आने की वजह
उन्होंने बताया कि हरियाणा में सर्द मौसम के दौरान बड़े स्तर पर गेहूं और सरसों की खेती होती है. इन फसलों में कई तरह के कीट मंडराते हैं, जिनको आहार बनाकर ये गुजारा करते हैं. इसलिए हर साल ये पक्षी इधर आते हैं. यहां उन्हें खाने की तलाश में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती हैं. ये सदियों से यहां आ रहे हैं और ये यहां खाने और पानी की तलाश में आते हैं. अधिकतर पक्षी 100 से 150 मीटर के दायरे में ही रहते हैं. इस समय इनके प्रजनन की संभावना बेहद कम होती है.
