झज्जर | मंगलवार को हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. प्रदेश के 7 जिलों सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी के 100 से भी ज्यादा गांवों में गेहूं, सरसों और चने की फसल खराब हो गई है. बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से न केवल उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि फसल की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ेगा. मौसम विभाग ने बताया कि 3 और 4 अप्रैल को फिर से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है. यदि दोबारा बारिश और ओलावृष्टि होती है तो किसानों की बची-खुची उम्मीदें भी मिट्टी में मिल जाएगी.
इन गांवों में पहुंचा नुकसान
हिसार जिले के 40 से ज्यादा गांवों में बारिश और ओलावृष्टि से फसलों में नुकसान पहुंचा है. इनमें मात्रश्याम, किरतान, रावलवास, शाहपुर, सीसवाला, रायपुर, शिकारपुर, खोखा, धांसू, खरकड़ी, नियाणा, मिर्जापुर, बुगाना, राजली, पंघाल, ढाणी खानबहादुर, जाखोदखेड़ा, मंगाली, सिंघरान, हरिकोट, डाबड़ा, कालवास, काबरेल, चौधरीवाली, घुड़साल, बांडाहेड़ी, तेलनवाली, कुतियांवाली, डोभी, खारिया, रावतखेड़ा, सिवानी, चिड़ौद, ढाणी सीसवाल, आदमपुर और बालसमंद शामिल हैं.
झज्जर जिले के जिन गांवों में बारिश और ओलावृष्टि से फसलें खराब हुई है उनमें रईया, डावला, हसनपुर, जहांगीरपुर, कोट, बोड़िया, गुड्डा, बिरधाना, खेड़ी आसरा, भदानी, कबलाना सहित कई अन्य गांव शामिल हैं. फतेहाबाद के जिन गांवों में बारिश और ओलावृष्टि से फसलें प्रभावित हुई है उनमें भट्ट कलां, किरढान, सिरढान, ढिंगसरा, हांसपुर, हिजरावां कलां, हड़ौली, मल्हड़, दरियापुर, करनौली, गिलाखेड़ा, चनकोठी, रजाबाद, खान मोहम्मद, सूलीखेड़ा, अकांवाली, धांगड़, अहली सदर सहित कई अन्य गांव शामिल हैं.
मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान
बारिश और ओलावृष्टि से चना, गेहूं और सरसों की फसल में हुए नुकसान पर सीएम नायब सैनी ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं. प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का महत्व जानता हूं. पटवारियों और तहसीलदारों की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा.
किसानों के नुकसान की भरपाई करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने प्रभावित जिलों के उपायुक्तों को गिरदावरी कराने का निर्देश दिया है, ताकि किसानों को सरकार की ओर से मुआवजा राशि वितरित की जा सकें. मुख्यमंत्री की ओर से जिला उपायुक्तों को गिरदावरी कराने के आदेश में कहा गया है कि सर्वे में पूरी तरह से पारदर्शिता बरती जाए और क्षेत्र के एसडीएम खुद मौके पर जाकर देखें. रिपोर्ट तैयार होने पर उपायुक्त भी उसका अपने स्तर पर आंकलन करने के बाद मुख्यालय भेजें.
कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि बारिश और तेज हवाओं से गेहूं की फसल जमींदोज हो गई है. ओलावृष्टि से दाना झड़ने और फसलों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. ऐसे में किसान साथी फसल सुखने तक कटाई न करें. वहीं, जिन जगहों पर सरसों कट चुकी है, वो अपनी फसल एक जगह पर इकट्ठा कर तिरपाल से ढक लें. अभी फिर से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है.
