झज्जर | खेल मैदान से हरियाणा के लिए एक और गौरवमई खबर सामने आई है. यहां झज्जर जिले के गांव मच्छरौली के बेटे रामपाल ने पैरा खिलाड़ी होते हुए सामान्य वर्ग के खिलाड़ियों की प्रतियोगिता में भाग लेते हुए गोल्ड मेडल जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. 3 बार के पैरा ओलंपियन रामपाल ने एशियन मास्टर चैंपियनशिप में हाई जंप इवेंट में इस उपलब्धि को हासिल किया है.
एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले पैरा एथलीट रामपाल आज हरियाणा खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. महज 3 साल की उम्र में उन्होंने अपना दाया हाथ गंवा दिया था लेकिन खेल मैदान से उनके द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों की बदौलत आज वो पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं.
उनका जीवन अटूट संघर्ष और संकल्प की मिसाल है. बचपन में एक हादसे में हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि और ज्यादा मजबूती से खुद को खेल मैदान में स्थापित किया. उन्होंने अपने दमदार खेल से कई बार देश- दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया है.
जीतने वाले पहले एथलीट
2 बार पैरा एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल विजेता रामपाल ने हाल ही में जो उपलब्धि हासिल की है, वह कई मायनों में खास हैं. उन्होंने मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास रचा है. खास बात यह है कि यह प्रतियोगिता सामान्य खिलाड़ियों के लिए थी लेकिन रामपाल ने पैरा खिलाड़ी होते हुए इन खिलाड़ियों के बीच गोल्ड मेडल जीतकर सबको चौंका दिया है. उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि आप कड़े परिश्रम को तवज्जो देते हैं तो दिव्यांगता आपको सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती है.
खुशी की जाहिर
एशियन मास्टर चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने पर खुशी जाहिर करते हुए रामपाल ने कहा कि मैंने कभी खुद को दूसरों से कम नहीं समझा. मैंने निरंतर कड़ी मेहनत करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की चाहत रखी और खेल ने मुझे आत्मविश्वास दिया. उन्होंने युवाओं से आग्रह करते हुए कहा कि यदि आप सच्ची लगन और निष्ठा से अपने प्रयास जारी रखेंगे तो एक दिन सफलता आपके कदम अवश्य चूमेगी.
