जींद | हरियाणा में इस बार धान की फसल के उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन भाव कम मिलने से किसानों में मायूसी छाई हुई है. उचाना मंडी की बात करें तो यहां मार्केट कमेटी के आंकड़ों के अनुसार 1121 धान की किस्म की आवक 4 लाख 19 हजार 680 क्विंटल हो चुकी है, जो पिछले साल से 48 हजार 416 क्विंटल ज्यादा है. इस बार किसानों (Haryana Kisan) को भाव कम मिला है.
1 हजार रूपए प्रति क्विंटल तक गिरावट
1121 किस्म के धान की बात करें तो पिछले साल उचाना मंडी में किसानों को 4,800 रूपए प्रति क्विंटल तक भाव मिला था, लेकिन इस बार अधिकतम भाव 4,000 रूपए प्रति क्विंटल तक ही मिल पाया है. यानि भाव में 800 रूपए प्रति क्विंटल तक गिरावट आई है.
किसानों का कहना है कि भाव में एक हजार रूपए प्रति क्विंटल तक गिरावट से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. खाद- बीज, कीटनाशक आदि खर्चे और ऊपर से यदि ठेके पर जमीन लेकर खेती की गई है तो बचत निकालना मुश्किल हो गया है. अधिक भाव के इंतजार में धान की फसल को घर पर स्टोर किया, लेकिन भाव में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई.
कपास की आवक में गिरावट
उचाना मंडी में इस साल कपास की आवक 69,255 क्विंटल रही है, जो पिछले साल के मुकाबले 44,318 क्विंटल कम है. मार्केट कमेटी के सचिव योगेश गुप्ता ने धान की आवक में बढ़ोतरी और कपास की आवक में गिरावट की पुष्टि की है. किसानों का कहना है कि इस बार धान और कपास दोनों ही फसलें किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई है.
