जींद | सफीदों उपमंडल के गांव मुआना का रहने वाला निशांत भी था. वह इसी साल जनवरी में मोटी रकम खर्च कर डंकी के रास्ते से अमेरिका पहुंचा था, लेकिन उसे वहीं बार्डर पर पकड़ लिया गया. अब उसे डिपोर्ट करके वापस भारत भेज दिया गया है. एक अच्छी लाइफस्टाइल और अपने सपनों को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में पंजाब- हरियाणा सहित कई अन्य राज्यों के लोग मोटी रकम खर्च कर और जोखिम भरे रास्तों से होते हुए विदेश पहुंचते हैं.
55 लाख हुए खर्च
निशांत के पिता ने बताया कि शुरूआती तौर पर एजेंट के साथ 36 लाख रुपए में सौदा तय हुआ था, लेकिन एजेंट ने इधर- उधर फंसने की बात कहकर परिवार से करीब 55 लाख रुपए ले लिए. इसके लिए उन्होंने डेढ़ एकड़ जमीन बेच दी थी. वह इसी महीने मुआना से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था. रविवार को अमेरिका द्वारा वापस भेजे गए 116 भारतीयों में हरियाणा के 33 युवाओं में गांव मुआना निवासी निशांत का नाम भी शामिल है.
पिता अशोक ने बताया कि खेती- बाड़ी से ठीक- ठाक परिवार का पालन- पोषण हो रहा था, लेकिन निशांत विदेश में जाकर पैसा कमाना चाहता था, ताकि उसका परिवार समृद्ध हो सके. वह अच्छे पैसे कमाकर धूमधाम से अपनी बहनों की शादी करना चाहता था, लेकिन सारे सपने धरे- धराएं रह गए. उनके विदेश जाने में 5 एकड़ जमीन बिक गई और अब मात्र आधा एकड़ जमीन बची है. जिसपर परिवार का गुजारा होना भी अब मुश्किल हो गया है.
निशांत ने डंकी के रास्ते अमेरिका में एंट्री तो कर ली थी लेकिन उसे बॉर्डर पर ही पकड़ लिया गया. अब उसे वहां की सरकार के द्वारा डिपोर्ट करके वापस भेज दिया गया. उसके भारत लौटने से स्वयं उसके और परिवार के सपने चकनाचूर हो गए हैं.
जींद के रवि की भी यहीं कहानी
जींद शहर के रवि की भी ऐसी ही कहानी है. वह पिछले साल जुलाई में अमेरिका जाने के लिए घर से निकला था. एजेंट के साथ 29 लाख रूपए में डील हुई थी. एजेंट ने पहले दुबई और फिर वहां से लीगल तरीके से अमेरिका भेजने की बात कही थी, लेकिन उसे पनामा के जंगलों से डंकी रूट के जरिए अमेरिका गए. जंगलों में जाकर एजेंट ने 6 लाख रुपए की और मांग की. इसके बाद, रवि को कई महीनों तक भूखे- प्यासे जंगल में भटकाते रहें. इस दौरान रवि को काफी मुश्किलें झेलनी पड़ी.
एजेंट द्वारा 6 लाख रूपए की डिमांड को रवि के पिता ने प्लाट बेचकर पूरा किया. इसके बाद, 20 दिन पहले ही रवि दीवार कूदकर अमेरिका पहुंचा था, तभी वापस डिपोर्ट कर दिया गया. रवि को कई देशों से होकर गुजारते हुए करीब 9 महीने में अमेरिका पहुंचाया गया था, लेकिन 20 दिन बाद ही डिपोर्ट कर दिया गया. एजेंटों ने 35 लाख रूपए हड़प लिया. परिजनों के अनुसार, शामलो के दीपक मलिक, रजत मोर और मनीष पंडित पेटवाड़ ने उसे अमेरिका भेजा था.
