जानिये कैसे पड़ा हरियाणा के इस गाँव का नाम रसीना और इससे जुड़ी मान्यताएं

कैथल । कैथल के खंड पुंडरी के गांव रसीना का नाम किसी साधु या तीर्थ के नाम पर नहीं, बल्कि गांव में सबसे पहले बसने वाली व्यक्ति के नाम पर पड़ा है. गांव में स्थित बाबा काशीपुरी की समाधि की काफी मान्यता है. ऐतिहासिक मान्यता है कि बाबा काशीपुरी के आदेश पर इस गांव को बसाया गया था. इस गांव का इतिहास करीब 700 वर्ष पुराना है. वहीं ग्रामीण महेंद्र रसीना ने बताया कि गांव में बाबा काशीपुरी की समाधि है. यहां पर बड़ी श्रद्धा से लोग पूजा अर्चना करते हैं.

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700 वर्ष पुराना है इस गांव का इतिहास

करीब 700 साल पहले बाबा काशीपुरी के पास हाबड़ी के पंडित ने खेड़ी साकरा निवासी राय सिंह के साथ मिलकर गांव में परिवार को लाकर बसने की अनुमति मांगी थी. जिसके बाद से इस गांव का नाम रायसिंह के नाम पर ही रसीना पड़ा. इस गांव के बसने के कुछ साल बाद ही बाबा काशीपुरी पंचतत्व में विलीन हो गए. उनकी समाधि आज भी आस्था का प्रतीक बनी हुई है. वही गांव में बाबा काशीपुरी की समाधि पर भव्य मंदिर का निर्माण करके मंदिर में बाबा की प्रतिमा को भी स्थापित किया गया है.

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यहां मान्यता है कि समाधि पर दूध चढ़ाने से श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है. ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार ऋण मोचन तीर्थ काफी प्रसिद्ध है. प्राचीन ऋण मोचन तीर्थ का उल्लेख पौराणिक साहित्य के तहत वामन पुराण, ब्रह्म पुराण व मत्स्य पुराण में भी मिलता है. पौराणिक साहित्य में इस तीर्थ को ऋणप्रमोचन तीर्थ के नाम से जाना जाता है. इसका शाब्दिक अर्थ ऋणो से मुक्त करवाने वाला ही माना जाता है. ब्रह्मा पुराण में इस तीर्थ से संबंधित कथा है. जिसके अनुसार पुराने समय में कक्षीवान नामक राजा के 2 पुत्र थे.

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