कैथल | आज के समय में जहां लोग चकाचौंध की दुनिया में व्यस्त हैं. यदि कोई थोड़ी भी मदद कर देता है, तो उसे सोशल मीडिया के जरिए दिखाने की कोशिश करता है. कई बार सामाजिक कार्यक्रमों या अन्य अवसरों पर यह देखने को मिल जाता है, लेकिन इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी हैं जो चुपचाप, बिना पब्लिसिटी या सरकारी मदद के इंतजार के अपना काम करते रहते हैं.

इन्हें न तो प्रसिद्धि की जरूरत होती है और न ही किसी अन्य प्रलोभन की. ऐसे निस्वार्थ काम करने वाले लोगों को कई बार आम जनता पागल, सिरफिरा या अन्य नामों से पुकारती है, लेकिन समाज सेवा का जज्बा लिए ये लोग बिना किसी की परवाह किए अपना काम करते रहते हैं.
पर्यावरण संरक्षण में जुटे राजपाल
कैथल के किच्छाना गांव के राजपाल रापाड़िया उर्फ राजा का ऐसा ही एक उदाहरण है. लगभग 70 वर्षीय यह बुजुर्ग सिर्फ नाम के ही राजा नहीं हैं, बल्कि दिल के भी राजा हैं. इन्होंने समाज में ऐसी मुहिम छेड़ी है, जिसे बड़ी- बड़ी सरकारें और प्रशासन भी मिलकर नहीं कर पा रहे हैं. राजपाल ने अपने गांव और आसपास के इलाकों में अब तक 600 से ज्यादा पेड़ लगा दिए हैं. इनमें से लगभग 400 पेड़ अब बड़े होकर लोगों को छाया देने का काम कर रहे हैं और पर्यावरण को भी सुरक्षित बना रहे हैं. इतना ही नहीं, राजपाल पेड़ को लगाने के बाद उनकी सुरक्षा के लिए बाउंड्री भी लगाते हैं.
बिना किसी मदद के अकेले कर रहे काम
खास बात यह है कि इस काम में उन्हें किसी प्रकार की मदद नहीं मिल रही है. सारा खर्चा वह खुद ही उठा रहे हैं. उन्होंने इस काम के लिए एक मोटरसाइकिल के पीछे रेहड़ी लगा रखी है, जिसमें पौधों को डालकर ले जाते हैं और जरूरत के हिसाब से उन्हें लगा देते हैं. उनका यह जज्बा देखकर लोग उनकी खूब सराहना करते हैं. हालांकि, उन्हें किसी से आर्थिक मदद नहीं मिल रही है. आसपास के लोग भी उनके इस काम की सराहना भी करते हैं.
मन में अब भी टीस
पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का संदेश देते हुए राजपाल कहते हैं कि इस काम के लिए उन्हें परिवार का भरपूर सहयोग मिलता है. बीते कई सालों से वह इस काम को करने का बीड़ा उठाए हुए हैं. हालांकि, उनके मन में यह टीस है कि जब वह मोटरसाइकिल पर पौधों को दूर- दराज के गांव में लगाने के लिए ले जाते हैं, तो काफी खर्च और समय लग जाता है. उन्हें इस काम के लिए एक ई- रिक्शा की जरूरत महसूस होती है, ताकि ज़्यादा गांवों में जाकर पेड़- पौधे लगा सकें.