करनाल | हरियाणा सरकार (Haryana Govt) की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर ऑर्गेनिक और बागवानी खेती की ओर तेजी से रूख कर रहे हैं. ऐसा ही एक प्रयास करनाल जिले के गांव सांभली के किसान रमन ने किया है, जो रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किए बगैर ऐपल बेर की ऑर्गेनिक खेती कर रहा है. इससे जहां उसे लाखों रूपए की आमदनी हो रही है, तो वहीं अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बना हुआ है.
इस तरह हुई शुरूआत
किसान रमन ने बताया कि साल 2020 में उसने अपने एक मित्र की सलाह पर 2 एकड़ जमीन पर कश्मीरी ऐपल बेर के लगभग 200 पौधे लगाकर इस खेती की शुरुआत की थी. इन पौधों में ज्यादा खाद- पानी की जरूरत नहीं पड़ती है. वहीं, इस किस्म के पेड़ बहुत जल्दी ग्रोथ करते हैं और फल भी जल्दी ही आ जाता है. पहले इस पर लाल रंग फिर संतरी और फिर यह पीले रंग में आ जाता है. इस फल का स्वाद बहुत मीठा होता है.
इसलिए खास है कश्मीरी ऐपल बेर
- सेब और बेर दोनों का स्वाद मिलता है.
- खाने में काफी मीठा और स्वादिष्ट होता है.
- इसका पौधा एक साल में ही फल देने लगता है.
- कम मेहनत में अच्छा- खासा मुनाफा कमाया जा सकता है.
- कम ऊंचाई वाले पहाड़ पर इसकी खेती की जाती है.
- भारत के कई राज्यों में इसकी खेती हो रही है.
इस तरह से होती है देखभाल
आमतौर पर इसमें बारिश के पानी से ही काम चल जाता है. फरवरी से अप्रैल महीने तक इसका फल उतारने के बाद पेड़ों की कटिंग की जाती है. सितंबर के महीने में जैसे ही पेड़ों पर फ्लोवेरिंग होनी शुरू होती है, तब पेड़ों की जड़ के आसपास पानी को एकत्रित नहीं होने देना चाहिये. बस इन्हीं बातों का ध्यान रखने से इन पेड़ों से अच्छी- खासी मात्रा में फल लिया जा सकता है. इस पौधे को बीमारी मुक्त पौधा भी कहा जाता है.
कितनी होती है पैदावार
रमन ने बताया कि एक पौधे से लगभग 200- 250 किलो फल की पैदावार मिलती है और मंडी में इसका भाव 80 से 120 रूपए प्रति किलो तक मिल जाता है. उसने बताया कि देश ही नहीं बल्कि विदेशी लोग भी इस ऑर्गेनिक खेती से काफी प्रभावित हुए हैं और वे इस खेती की जानकारी लेने के लिए आते रहते हैं.
फ्रांस से पहुंची महिला गेरिल ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती से मैं बहुत ज्यादा प्रभावित हूं. इस प्रकार की फार्मिंग की तकनीक को मैं अपने देश मे भी ले जाना चाहूंगी. मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लगा. रमन ने बताया कि कम लागत में अधिक मुनाफा चाहिए तो किसानों को ऑर्गेनिक और बागवानी खेती को बढ़ावा देना होगा.
