करनाल | हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. बता दें कि गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, करनाल ने गन्ने की एक नई उन्नत किस्म कर्ण-18 (CO 18022) विकसित कर दी है.
क्या हैं खासियतें?
करनाल गन्ना प्रजनन संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर एमआर मीणा ने गन्ने की इस नई किस्म के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह हरियाणा सहित UP, राजस्थान, उत्तराखंड और पंजाब के किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी. इस किस्म से न केवल अच्छा उत्पादन मिलेगा बल्कि इसमें बीमारियां आने का खतरा भी नाममात्र रहेगा जिससे किसानों को कीटनाशक दवाओं के अतिरिक्त खर्च से छुटकारा मिलेगा.
उन्होंने बताया कि यह किस्म जलवायु के अनुकूल है और इसके साथ-साथ लवणीयता व सुखे के प्रति सहनशील हैं. इसके चलते बंपर पैदावार की उम्मीदें लगाई जा सकती है. लवणीयता व सुखा मौसम इस किस्म के उत्पादन को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगा.
डॉ मीणा ने बताया कि गन्ने की फसल में सबसे ज्यादा खतरा लाल सड़न रोग टॉप बोरर कीट की बीमारी का रहता है क्योंकि इससे उत्पादन प्रभावित होता है लेकिन गन्ने की नई किस्म कर्ण- 18 लाल सड़न रोग के प्रति प्रतिरोधी है. इसमें टॉप बोरर कीट की बीमारी आने की संभावना भी नाममात्र ही रहेगी.
बंपर पैदावार के साथ जबरदस्त कमाई
उन्होंने बताया कि यह नई किस्म मौजूदा किस्म CO-05011 को रिप्लेस करेगी और इसकी मोड़ी फसल (रेटून) भी काफी अच्छी होगी. इस किस्म का औसत उत्पादन 986 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आंका गया है जबकि चीनी मिलों में रिकवरी लगभग 11% रहने की उम्मीद है.
यह किस्म लगभग एक साल में पककर तैयार हो जाती है. इसकी बसंतकालीन बुवाई का समय फरवरी-मार्च तथा शीतकालीन बुवाई का समय सितंबर-अक्टूबर महीने में रहेगा. फरवरी के पहले सप्ताह से चीनी मिलों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को इसका बीज उपलब्ध कराया जाएगा. गन्ने की यह नई किस्म अच्छी पैदावार के साथ जबरदस्त कमाई का एक मजबूत विकल्प बनेगी, जो आने वाले समय में गन्ना किसानों के लिए वरदान साबित होगी.
